विपक्षी गठबंधन INDIA में एकजुटता की कोशिशों को उस वक्त झटका लगा, जब आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने खुलकर कहा कि वह 2029 में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं। तेजस्वी ने राहुल को “बड़े भाई” बताते हुए कहा कि वह इस लक्ष्य के लिए काम करेंगे।
लेकिन यह बयान कई सहयोगियों को खटक गया। तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी इससे खासे नाराज़ बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक अभी विपक्षी एकता को मज़बूत करने में लगे हैं और राहुल गांधी के साथ बेहतर तालमेल भी बना रहे हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि 2029 की बहस बेहद असमय और भटकाने वाली है।
अरविंद केजरीवाल पहले से ही INDIA से दूरी बनाए हुए हैं। उन्होंने विपक्षी उपराष्ट्रपति उम्मीदवार (पूर्व ISRO वैज्ञानिक सुदर्शन रेड्डी) को समर्थन तो दिया, लेकिन साफ कहा कि वो INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने यह समर्थन भी सिर्फ ममता बनर्जी के आग्रह पर दिया।
तृणमूल कांग्रेस भी खुद को गठबंधन का सक्रिय हिस्सा नहीं मानती। पार्टी की शर्त साफ है — कांग्रेस अगर बंगाल में CPM से गठबंधन तोड़े, तभी तृणमूल किसी साझा मंच पर साथ आएगी।
तेजस्वी का बयान विपक्ष के भीतर नेतृत्व को लेकर पुरानी दरारों को फिर उभार रहा है। जहां कुछ दल राहुल गांधी को आगे बढ़ाना चाहते हैं, वहीं कई क्षेत्रीय दल अब भी इस पर सहमति से कोसों दूर हैं।
क्या विपक्ष की एकता एक बार फिर बयानबाज़ी की भेंट चढ़ जाएगी?
