बिहार में चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद रविवार को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी। इसके साथ ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने न तो किसी नाम के जोड़ने और न ही हटाने को लेकर आयोग के पास कोई आपत्ति दर्ज कराई। “यह साबित करता है कि राहुल गांधी की ‘वोट चोरी’ वाली बात सिर्फ झूठी राजनीति है। उनकी यात्रा लोकतंत्र बचाने के लिए नहीं, बल्कि लोगों को गुमराह करने और अवैध प्रवासियों को बचाने के लिए थी, जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा है,” मालवीय ने कहा।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि राहुल गांधी का नैरेटिव सिर्फ चुनावी हार छुपाने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर अविश्वास पैदा करने का तरीका है।
हालाँकि, कांग्रेस नेताओं ने इसे पूरी तरह से चुनाव आयोग की नाकामी बताया। बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि यह प्रक्रिया जनता या किसी राजनीतिक दल की माँग पर नहीं, बल्कि “लापरवाही और अपारदर्शिता” के साथ की गई। वहीं, वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने सवाल उठाया कि “47 लाख मतदाता आखिर कौन हैं जिन्हें लिस्ट से हटा दिया गया? इनमें कितने मृतक हैं, कितने दूसरे राज्यों में चले गए और कितने ‘घोस्ट वोटर’ थे?”
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अंतिम सूची जारी करते हुए सभी मतदाताओं और राजनीतिक दलों को धन्यवाद दिया। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, बिहार में अब कुल 7.42 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं, जबकि जून 2024 तक यह संख्या 7.89 करोड़ थी।
