बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम’ पांच साल बाद दोबारा शुरू किया गया है। इस दरबार में कई जिलों के लोग अपनी समस्या लेकर मुख्यमंत्री से सीधे संवाद करने पहुंचे। इसी बीच एक अजीबोगरीब वाकया देखने को मिला।
एक युवक ने मुख्यमंत्री से कहा कि उसे ब्लैक फंगस के लक्षण है। इतना सुनते ही वहां बैठे सभी लोग सतर्क हो गए और मुख्यमंत्री ने तुरंत स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को फोन लगाकर कहा कि एक युवक के द्वारा ब्लैक फंगस की शिकायत की जा रही है कृपया उसके इलाज में जल्दी लाई जाए।
इसके बाद युवक की आईजीआईएमएस में जांच कराई गई जहां ब्लैक फंगस की कोई पुष्टि नहीं हुई। हालांकि मजिस्ट्रेट द्वारा पूरी जांच किए जाने के बाद ही उसे दरबार में जाने की इजाजत दी गई थी। आने वाले सभी लोगों का संबंधित जिले में ही कोरोना जांच कराने के बाद सिर्फ नेगेटिव जांच रिपोर्ट वालों को ही इस कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी जानी है।
स्वास्थ्य और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अन्य मामलों में एक घटना यह भी देखने को मिली कि सुपौल जिले के राघोपुर प्रखंड स्थित राघोपुर पंचायत से एक युवक यह शिकायत लेकर पहुंचा कि उनके यहां कागज पर उप स्वास्थ्य केंद्र, ओपीडी और हाजिरी चल रही है।
मुख्यमंत्री ने तुरंत स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत से बात की तो पता चला कि भवन नहीं होने की वजह से पंचायत भवन में उप स्वास्थ्य केंद्र चल रहा। औरंगाबाद से भी इसी तरह का एक मामला पहुंचा। शिकायतकर्ता ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डाॅक्टर नहीं आते। स्वास्थ्य केंद्र की दीवार गिर गयी है जिसकी वजह से केंद्र चलता भी नहीं।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य, शिक्षा, कल्याण, विज्ञान एवं प्रावैधिकी, श्रम संसाधन, सामान्य प्रशासन विभाग, कला संस्कृति और वित्त विभाग से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई हुई जिसके लिए उन विभागों के मंत्री व अधिकारी मौजूद रहे।
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