क्वॉड देशों की बैठक में हिस्सा लेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जानें किन मुद्दों पर होगी चर्चा

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 सितंबर को वाशिंगटन डीसी में होने वाले लीडर्स समिट ऑफ क्वाड्रिलेटरल फ्रेमवर्क में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन, जापान के प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ हिस्सा लेंगे। सभी नेता इस वर्ष 12 मार्च को हुए अपने पहले आभासी शिखर सम्मेलन के बाद से हुई प्रगति की समीक्षा और साझा हित के क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

24 सितंबर को होने वाली इस क्वॉड समिट में पहली बार चारों देशों के राष्ट्राध्यक्ष आमने-सामने बैठकर हिस्सा लेंगे। इससे पहले कोरोना के कारण क्वॉड की सभी बैठकें वर्चुअल तरीके से की गई हैं।

 कोरोना जैसी वैश्विक महामारी को रोकने के अपने चल रहे प्रयासों के तहत सभी राष्ट्राध्यक्ष मार्च में घोषित की गई ‘क्वाड वैक्सीन’ पहल की समीक्षा करेंगे। समकालीन वैश्विक मुद्दों जैसे महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों, कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता या आपदा राहत, जलवायु परिवर्तन और शिक्षा पर भी विचारों का आदान-प्रदान होगा।

इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से आमने-सामने मिलेंगे। कोविड काल में प्रधानमंत्री का यह दूसरा विदेश दौरा है।

कहा जा रहा है कि यह सम्मेलन चार देशों के मजबूत गठजोड़ “क्वाड” नेताओं के बीच मुक्त संवाद और बातचीत के लिए एक मूल्यवान अवसर प्रदान करेगा। संवाद सभी चार देशों के लिए महत्वाकांक्षी खुले और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को सुनिश्चित करने के उनके साझा दृष्टिकोण पर आधारित होगा।

व्हाइट हाउस ने सोमवार को यह जानकारी दी कि राष्ट्रपति जो बाइडन अगले सप्ताह क्वाड देशों (अमेरिका, भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया) के नेताओं की भौतिक मौजूदगी वाले पहले शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी का इस सफर के दौरान वाशिंगटन, फिर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधन और क्वाड शिखर सम्मेलन में भाग लेने के साथ राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक करने का कार्यक्रम भी है।

राष्ट्रपति बाइडन ने मार्च में क्वाड नेताओं के पहले शिखर सम्मेलन की मेजबानी डिजिटल तरीके से की थी, जिसमें स्वतंत्र, उन्मुक्त, समावेशी, लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े हिंद-प्रशांत क्षेत्र का संकल्प व्यक्त किया गया था जो जबरन कब्जे जैसी बाधाओं से मुक्त हो। इसे एक तरह से चीन के लिए संदेश के तौर पर देखा गया था।

व्हाइट हाउस ने कहा, “क्वाड नेताओं की वार्ता हमारे संबंधों को मजबूत करने पर फोकस होगी। इसमें कोरोना से निपटने, जलवायु संकट का सामना करने, उभरती प्रौद्योगिकियों और साइबर स्पेस पर साझेदारी करने और एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक को बढ़ावा देने जैसे क्षेत्रों पर आपसी व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी।”

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