भारतीय जनता दाल की नई टीम घोषित होने के बाद अब सब केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार होने का इंतज़ार कर रहे है. सूत्रों की माने तो इस समय दो तरह की चर्चाएं ज़ोरों पर है. कुछ नेताओं का कहना है कि बिहार चुनाव के मद्देनज़र कैबिनेट विस्तार जल्द से जल्द होना चाहिए वहीं कुछ नेताओं का मानना है कि बिहार चुनाव के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाना चाहिए.
प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी ने 57 मंत्रियों के साथ 30 मई 2019 को दूसरे कार्यकाल की शपथ ली थी. तब से अब तक 16 महीनों का समय बीत चुका है मगर मंत्रिमंडल का पहला विस्तार अभी तक नहीं हुआ है. प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल में शपथ लेने के 6 महीने के भीतर ही पहला मंत्रिमंडल विस्तार हो गया था.
मोदी के मंत्रीमंडल में फिलहाल 24 कैबिनेट, 9 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 24 राज्यमंत्री शामिल है. हाल ही में रेल राज्यमंत्री सुरेश अंगड़ी की मृत्यु और दो मंत्रियों के इस्तीफे के बाद मंत्रियों की संख्या घटकर 54 रह गई है. आपको बतादें की लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत यानी अधिकतम 81 मंत्री ही बनाये जा सकते है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से ही ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ पर जोर देते हैं इसीलिए अपने पिछले कार्यकाल में भी मोदी के मंत्रिमंडल में केवल 70 मंत्री ही शामिल थे. सूत्रों की माने तो इस बार भी ज्यादा मंत्री बनाने की संभावना कम ही नज़र आ रही है.
मंत्रिमंडल विस्तार के लिए जिन लोगों का सबसे ज्यादा ज़िक्र हो रहा है उसमें इसमें विनय सहस्रबुद्धे, डॉ. अनिल जैन, सरोज पांडेय, राम माधव और पी. मुरलीधर राव का नाम सबसे ऊपर है.
