19 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र को लेकर संसद में तैयारियां शुरू कर दी गई है। कोरोना से बचाव को लेकर हर तरह के प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा। जहां संसद के 311 सदस्य ने टीके के दोनों डोज़ ले लिए हैं वहीं 127 सदस्यों को टीके का एक डोज़ मिल चुका है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि अब संसद के अंदर आने के लिए हर बार आरटीपीसीआर जांच जरूरी नहीं होगी। जिन व्यक्तियों ने टीका नहीं लिया है सिर्फ़ उनकी कोरोना की जांच की जाएगी।
हालांकि 543 लोकसभा सदस्यों में से सिर्फ़ 29 सदस्यों ने टीका नहीं लिया जिनमें से 12 सदस्य या तो किसी मेडिकल कारणों से या कोविड से पीड़ित होने के कारण टीकाकरण नहीं करा पाए।
इन सबके साथ अब एक नया तरीका मुस्तैद किया जा रहा है। केंद्रीय साइंस और तकनीकी राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को बताया कि अल्ट्रावॉयलेट किरणों पर आधारित यूवी कीटाणुनाशक तकनीक हवा में कोरोना वायरस की रोकथाम करेगी।
काउंसिल आॅफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के वैज्ञानिकों के साथ हुई मीटिंग में संसद के मानसून सत्र के दौरान इस तकनीक को उपयोग में लाने की चर्चा हुई। शुरुआत में इसे सेंट्रल हॉल, लोकसभा चेंबर और कमेटी कक्षा 62 और 63 में स्थापित किया जाएगा।
साथ ही में उन्होंने कहा कि हालांकि इस तकनीक के उपयोग में लाए जाने के बाद भी सभी सदस्य प्रोटोकॉल का पालन करते रहेंगे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी इस तरह के प्रयोगों को लेकर हमेशा उत्सुक रहते हैं।
यूवी आधारित कीटाणुनाशक तकनीक को वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद-सीएसआईआर, केंद्रीय साइंस और तकनीकी मंत्रालय से संबंद्धित द्वारा हाल ही में विकसित किया गया है जिससका प्रयोग बड़े सभागारों, सम्मेलन कक्ष, कक्षाओं और मॉल आदि में किया जा सकता है और साथ ही यह बड़े भवनों और वाहनों में भी प्रयुक्त हो सकती है।
इस विशेष विधि द्वारा यूवी प्रकाश का प्रयोग करके हवा में मौजूद कोरोना संक्त्रस्मण को निष्क्रिय किया जा सकता है। इसका सफल प्रयोग हैदराबाद और चंडीगढ़ में किया जा रहा है।
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6 thoughts on “कोरोना से बचाव के लिए संसद में अपनाई जाएगी यह नई तकनीक”