अब जनसंख्या नियंत्रण कानून पर भी नीतीश कुमार ने अपनाई भाजपा से अलग सोच

एनडीए से जुड़े रहने के बावजूद राम मंदिर का मुद्दा हो, धारा 370 या ट्रिपल तलाक, नीतीश कुमार भाजपा के इन मुद्दों का शुरू से ही विरोध करते देखे गए हैं।

इसके बाद सीएए,एनआरसी और एनपीआर जैसे मुद्दों पर भी उनका विरोध कायम रहा। इस बीच एनडीए में शामिल जद(यू) का रुख भाजपा के जनसंख्या नियंत्रण कानून के मामले में भी कुछ दूसरा ही नजर आ रहा है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अब जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाने का योगी आदित्यनाथ का आइडिया शायद पसंद नहीं आया है। नीतीश कुमार ने कहा कि “हर राज्य वह करने के लिए स्वतंत्र है जो वे चाहते हैं।

लेकिन मेरी राय बिल्कुल स्पष्ट है कि केवल कानून बनाने से जनसंख्या नियंत्रण के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता। जब महिलाएं शिक्षित होंगी तो वे पर्याप्त रूप से जागरूक होंगी और प्रजनन दर घटेगी।” उन्होंने कहा कि “हम साफ-साफ कहते हैं जिस राज्य को जो करना है वो करें, मगर मेरी सोच साफ है कि आप सिर्फ कानून बना कर जनसंख्या नियंत्रण करेंगे ये संभव नही है।

महिलाएं पढ़ी लिखी होंगी तो इतनी जागृति आती है कि प्रजनन दर घटेगी। आप लोगों ने देखा हम लोग शुरू से इस पर सर्वे और काम कर रहे हैं। मेरा अनुभव है कि 2040 तक वृद्धि नहीं रहेगी।हम लोग इस पर काम कर रहे हैं। बहुत लोग को लगता है कि यह सब कानून बना देने से हो जाएगा।

हम लोग तो मानते हैं कि और भी तरीका अपनाना होगा।अब जो पढ़े लिखे लोग हैं आप देख चुके हैं कि उनको भी कितने बच्चे हुए। अलग-अलग राज्य अपने ढंग से करें। आप चीन का उदाहरण देख लें। वहां बच्चों की संख्या को लेकर निर्णय लिया गया,अब देखिये वहां क्या हो रहा है।”

वहीं दूसरी तरफ जद(यू) संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने इस कानून का समर्थन किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख के उलट देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून को जरूरी बताते हुए, उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा कानून को लेकर किए गए पहल को भी स्वागत योग्य बताया है।

संगठन को मजबूत करने के लिए जद(यू) नेता उपेंद्र कुशवाहा बिहार दौरे पर निकले। उन्होंने मोतिहारी में कहा कि देश की जनसंख्या बढ़ने की वजह से करोड़ों लोगों को वह सुविधा नहीं मिल पा रही जिसके वह हकदार हैं।

दूसरी तरफ,बिहार की उपमुख्यमंत्री और आपदा प्रबंधन विभाग मंत्री, रेणु देवी का मानना है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए राज्य में कुपोषण दर में कमी, साक्षरता दर बढ़ाने और परिवार नियोजन के संबंध में व्यापक जागरूकता लाने की जरूरत है।

उनके सुझाव से जनसंख्या नियंत्रण के लिए महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को जागरूक करने की जरूरत है क्योंकि पुरुषों में नसबंदी को लेकर काफी डर देखा जाता है।

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