दुनिया के एक अजीबोगरीब दिखने वाले गोभी का पता चला है। इसके इतने अनोखे दिखने का कारण है इसके पिरामिड जैसी आकृति वाला टूटा हुआ फूल। इस गोभी का नाम है रोमनेस्को कॉलीफ्लावर (Romanesco Cauliflower)।

इसके अलावा इसे रोमनेस्को ब्रोकोली के नाम से भी जाना जाता है। वनस्पति विज्ञान की भाषा में इसका नाम ब्रेसिका ओलेरासिया है। जानकारी के मुताबिक, इस प्रजाति के तहत सामान्य गोभी के फूल, पत्ता गोभी, ब्रोकोली और केल जैसी सब्जियां उगती हैं।

रोमनेस्को कॉलीफ्लावर सेलेक्टिव ब्रीडिंग का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करती है। वैज्ञानिकों को अब जाकर इसकी वजह पता चल सकी है कि आखिर क्यों यह गोभी दिखने में इतनी अनोखी है। फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च के साइंटिस्ट फ्रांस्वा पार्सी और उनके साथियों ने अब यह पता लगा लिया है कि रोमनेस्को कॉलीफ्लावर के फूल इतने विचित्र क्यों होते हैं।

अध्ययन में पता लगा कि रोमनेस्को कॉलीफ्लावर में बीच में जो दानेदार फूल जैसी आकृतियां दिखती हैं, वो वाकई में फूल बनना चाहती हैं,लेकिन बन नहीं पाती। इस वजह से वो कलियों जैसे बड्स में रह जाती हैं जिसकी वजह से उनकी शक्ल ऐसी दिखती है।

रोमनेस्को कॉलीफ्लावर (Romanesco Cauliflower) के यही अविकसित फूल वापस से शूट्स बन जाते हैं, और फिर से फूल बनने का प्रयास करने में असफल होते हैं।

यह प्रक्रिया इतनी ज्यादा बार होती है कि एक बड के ऊपर दूसरा, उसके ऊपर तीसरा और फिर इसी तरह ये हरे पिरामिड जैसी आकृति बना लेते हैं।

फ्रांस्वा पार्सी ने बताया कि रोमनेस्को कॉलीफ्लावर फूल की तरह अपनी पहचान बनाना चाहता है, लेकिन ये असफल होता है।

सामान्य गोभी और रोमनेस्को में सिर्फ इतना अंतर ही है कि रोमनेस्को के हर फूल अलग-अलग दिखते हैं, जबकि गोभी के आपस में सटे और ज्यादा चिपके हुए होते हैं। रोमनेस्को कॉली से ज्यादा फूल निकलते हैं, इसलिए वह सामान्य गोभी से अलग दिखते हैं।

इसे बड़े चाव से खाया जाता है। इसका सबसे पहला उपयोग 16वीं सदी में इटली के कुछ प्राचीन दस्तावेजों में मिलता है।  अनोखी दिखने वाली ये दुनिया की सबसे विचित्र गोभी सिर्फ़ दिखने में खूबसूरत ही नहीं बल्कि कई गुणों से है भरपूर भी है। आमतौर पर यह हरे रंग की होती है। इसका स्वाद लगभग मूंगफली जैसा होता है जो पकने के बाद और स्वादिष्ट लगता है।

इसका उपयोग सब्जियों और सलाद में किया जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी, विटामिन के, डायटरी फाइबर्स और कैरोटिनॉयड्स होते हैं जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद माने जाते हैं। अमेरिका और यूरोपीय देशों में इसकी खेती भी की जाती है जिससे किसानों को काफी फायदा मिलता है और कीमत में यह 2000 से 2200 रुपए किलो की दर से बिकती है।

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