महिलाओं के खिलाफ हाल के दिनों में यूपी के हाथरस समेत देश के अलग अलग राज्यों में बढ़े अपराधों के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों को महिला सुरक्षा को लेकर सख्त एडवाइजरी जारी की है।
मंत्रालय ने अपनी एडवाइजरी में कहा है कि महिला अपराध के मामलों में पुलिस की कार्रवाई सुनिश्चित करें। ऐसे मामलों में सही तरीके से काम करने और मामलों में लापरवाही न बरतने का दिशा-निर्देश भी राज्यों को दिया गया है।
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी न की जाए। अपनी एडवाइजरी में गृह मंत्रालय ने कहा है कि एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। मंत्रालय ने आईपीसी और सीआरपीसी के प्रावधान गिनाते हुए कहा कि राज्य/केंद्रशासित प्रदेश इनका पालन सुनिश्चित करें।
एडवाइजरी में कहा गया है कि अगर अपराध थाने की सीमा से बाहर हुआ है तो ऐसे में जीरो एफआईआर का भी प्रावधान है।
गृह मंत्रालय ने कहा है कि सीआरपीसी की धारा 173 के मुताबिक रेप के मामले में दो माह के अंदर जांच का प्रावधान है। मंत्रालय ने इसके लिए अपने ऑनलाइन पोर्टल का उल्लेख करते हुए कहा है कि यहां से जांच की मॉनिटरिंग हो सकती है।
मृत व्यक्ति के बयान को भी गृह मंत्रालय ने जांच में अहम तथ्य बताया है। साथ ही यह भी कहा है कि फॉरेंसिक साइंस सर्विसेज डायरेक्टोरेट ने रेप के मामलों में फॉरेंसिक सबूत एकत्रित करने के लिए जो गाइडलाइंस बनाई हैं, उनका पालन किया जाए। देखें पूरी गाइडलाइंस-
