जम्मू-कश्मीर: महबूबा मुफ़्ती ने अनुच्छेद 370 हटने तक चुनाव नहीं लड़ने का किया फैसला

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा है की वह अब तब तक चुनाव नहीं लड़ेंगी जब तक जम्मू-कश्मीर में फिर से अनुच्छेद 370 की बहाली नहीं हो जाती. इसके लिए वह लगातार संगर्ष करती रहेंगी

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कश्मीर में महबूबा मुफ़्ती को नजरबंद से मुक्त करने के बाद सियासी गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं पहले जहाँ उन्होंने अपने आवास पर एक बैठक कर कश्मीर के बड़े नेताओं से मुलाकात की वहीँ आज श्रीनगर में नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के घर पर धारा 370 हटाए जाने को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाई गई। इस बैठक में नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती भी उपस्थित रही।

जम्मू-कश्मीर में अनुछेद 370 हटने के 14 महीने बाद रिहा हुई पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती को आज रिहा कर दिया गया है. जम्मू-कश्मीर प्रशासन के आधिकारिक प्रवक्ता रोहित कंसल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी.

कश्मीर को लेकर सुप्रीम फैसला,धारा 370 खत्म, दो भागों में बंटा कश्मीर

यह व्यवस्था ठीक वैसी ही होगी जैसे दिल्ली पर लागू होती है।आसान शब्दों में इसे समझें तो अब जम्मू कश्मीर की व्यवस्था अब बहुत हद तक दिल्ली की तरह होगी जहां अधिकतर शक्तियां केंद्र के प्रतिनिधि राज्यपाल या उप राज्यपाल के पास होंगी।

शाह नही यह शख्स है कश्मीर का गेमचेंजर, अभी नही तो कभी नही सुधरेंगे हालात?

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल एक दूसरे से मिले तो किसी को भी यह अंदाजा नही था कि इतना बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

30 साल में 7 वीं बार हो रही विपक्षी एकता की बात, इस बार आवाज़ दक्षिण से आई है

इस बार यह मुद्दा उठाया है दक्षिण के तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने और तो और कुछ दलों ने उनके बयान के बाद आश्वासन और स्वीकृति तक दे दी है।

क्या तय समय से पहले हो सकते हैं लोकसभा चुनाव, जानें क्या है सच

खबरों के मुताबिक अप्रैल में एलान हो सकते हैं। जी नही ऐसा अब इस माहौल में नही होगा जब कि बीजेपी अपने सहयोगियों और विपक्ष से घिरी हुई है। पहले ऐसा एलान इसलिए संभव था क्योंकि मोदी लहर फीकी पड़ने से पहले मोदी और बीजेपी यह मौका भुना लेना चाहते थे।

सेना को आदेश थमा दो घाटी गैर नही होगी, जहाँ तिरंगा नही मिलेगा उसकी खैर नही होगी

कश्मीर में तिरंगे का अपमान होता रहा, पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगते रहे,सेना सीमा की हिफाज़त में अपनी कुर्बानी देती रही लेकिन एक उचित आदेश तक सरकार से तामिल न हो सका जिसमें यह लिखा हो कि सेना अपने हिसाब से इस तरह की घटनाओं से निपट ले।