सऊदी अरब के पेट्रोलियम मंत्री खालिद अल फलीह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि मोदी और उनकी सरकार ने भारत में कारोबार करने को सुगम कर दिया है और वे ‘अच्छे दिन’ ला रहे हैं। हम भारत की हर जरूरत को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
राजनीति के गलियारों में यह चर्चा जरूर थी कि अगर मोदी बोलेंगे तो महफ़िल उन्ही के नाम होगी। हुआ भी यही। मोदी शुरू हुए तो विपक्ष को न जवाब सुझा न काट बस तेलगू देशम पार्टी के नेताओं ने मोर्चा संभाला लेकिन उसका भी काट मोदी लेकर आये थे।
देश मे इन दिनों अजीब माहौल है। असली मुद्दे गौण हैं और ऐसे मुद्दे चर्चा में हैं जो समझ से ही परे हैं। कहीं जातीय उन्माद है, कहीं धार्मिक उन्माद है तो कहीं आरक्षण के विरोध और समर्थन में हल्ला बोल है।
गुजरात के शहर अहमदाबाद से करीब 400 किलोमीटर दूर सौराष्ट्र के इलाके में विकास की नही तंगहाली की कहानियां गूंजती हैं। किसानों की आत्महत्या की खबर यहां आम बात है।
एक तरफ हम विकास की अंधी दौड़ में शामिल होकर अपनी संस्कृति और संस्कार भूलते जा रहे हैं वही छोटी-छोटी परेशानियों से तंग आकर आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं।
डिजिटल इंडिया की बात करने वाली सरकार ऐसे यज्ञ के आयोजन की अगुवा बनेगी तो सवाल उठने लाजमी भी हैं. क्या सरकार ऐसे जवाब देगी? कैसे कड़ी कारवाई होगी? क्या सरकार के पास अब कोई मुद्दा और कारवाई का दमखम नहीं है?