प्रतिष्ठित संस्था ब्लूमबर्ग की ओर से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 के चुनावों में मोदी आसानी से जीत हासिल करेंगे। इसके अलावा 2024 में भी उनकी वापसी की प्रबल संभावना है।
राजनीति के गलियारों में यह चर्चा जरूर थी कि अगर मोदी बोलेंगे तो महफ़िल उन्ही के नाम होगी। हुआ भी यही। मोदी शुरू हुए तो विपक्ष को न जवाब सुझा न काट बस तेलगू देशम पार्टी के नेताओं ने मोर्चा संभाला लेकिन उसका भी काट मोदी लेकर आये थे।
हंगामे और अविश्वास प्रस्ताव लाने की गहमागहमी के बीच शुरू हुए इस सत्र में क्या नतीजा निकलेगा और अपने अंतिम मॉनसून सत्र में सरकार क्या कुछ उपलब्धि हासिल कर पायेगी यह तो आने वाले कुछ दिनों में ही साफ हो पायेगा। बस जनता को सरकार और विपक्ष से सदन के सुचारू रूप से चलने देने की उम्मीद है।
मोदी की राजनीतिक सफर की कई कहानियां हैं, कई उपलब्धियां हैं, कई नाकामियां भी होंगी इसमे कोई संदेह नही लेकिन आखिर सीखता वही है जो गलतियां करता है। संगठन से लेकर सड़क और अब संसद तक पहुंचने वाले मोदी इसी संघर्ष की आग से तपकर निकले हैं।
खबरों के मुताबिक भारत अमेरिका से 110 लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में है। यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके लिए शुरुआती निविदा आमंत्रित भी की जा चुकी है। इस डील पर कुल खर्च 1.25 लाख करोड़ का होना अनुमानित हैं।
देश मे इन दिनों अजीब माहौल है। असली मुद्दे गौण हैं और ऐसे मुद्दे चर्चा में हैं जो समझ से ही परे हैं। कहीं जातीय उन्माद है, कहीं धार्मिक उन्माद है तो कहीं आरक्षण के विरोध और समर्थन में हल्ला बोल है।
कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर का गठबंधन अगर आने वाले भविष्य में जमीनी हकीकत बना तो शाह को सोचने की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो खुद बीजेपी के आंतरिक सर्वे में बीजेपी बहुमत से दूर दिख रही है।
दोनो नेताओं का अपनी-अपनी माँ के प्रति सम्मान और प्यार। राहुल जहां सोनिया के लाडले हैं वहीं मोदी भी कोई ऐसा मौका नही छोड़ते जहां माँ से मिलने की बात आती है।
कांग्रेस ने सपा-बसपा पर दबाव बनाने के मकसद से दोनों सीटों पर सपा प्रमुख अखिलेश के मना करने के बावजूद प्रत्याशी खड़े किए। इसके पीछे मकसद यह था कि या तो सपा झुके और एक एक सीट पर बात बने
राहुल के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस की छवि के साथ अपनी छवि को सुधारना है। कार्यशैली में बदलाव लाना है क्योंकि कांग्रेस आज भी नेहरू इंदिरा वाली कांग्रेस है इसमें कुछ भी नयापन नजर नही आता।
रेलवे में नौकरी देने की मांग को लेकर मुम्बई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन की पटरियों पर उतर आए हैं। इन छात्रों की मांग है कि इन्हें अप्रेंटिस की जॉब दी जाए।