दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस के नए वेरिएंट NB.1.8.1 को लेकर सतर्क हो गई है। यह वेरिएंट ओमिक्रॉन के उप-संस्करण JN.1 का सबवेरिएंट है और विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी फैलने की रफ्तार पहले से कहीं अधिक तेज है। चिंता इस बात की है कि NB.1.8.1 शरीर की पूर्व विकसित इम्यूनिटी को कुछ हद तक चकमा दे सकता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि अब तक इस वेरिएंट से जुड़ी गंभीर बीमारी के मामले सामने नहीं आए हैं। इसके लक्षण भी ओमिक्रॉन जैसे ही हैं—गले में खराश, बुखार, खांसी, थकान, सिरदर्द और मतली शामिल हैं। फिर भी इसकी तेज़ी से फैलने की क्षमता ने दुनिया भर की स्वास्थ्य एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है।
भारत में अब तक 1,000 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि वेरिएंट अधिकतर लोगों में गंभीर लक्षण नहीं दिखा रहा, लेकिन पहले से बीमार और बुजुर्ग लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
फाइजर, मॉडेर्ना और नोवावैक्स जैसी वैक्सीन अभी भी गंभीर संक्रमण और मौत से बचाने में कारगर हैं, लेकिन NB.1.8.1 के खिलाफ इनकी प्रभावशीलता कुछ हद तक कम हो सकती है।
विशेषज्ञों ने मास्क पहनने, भीड़ से बचने और लक्षण दिखने पर जांच कराने की अपील की है। साथ ही WHO समेत तमाम एजेंसियां नए वेरिएंट के खिलाफ अपडेटेड वैक्सीन विकसित करने में जुटी हुई हैं।
