भारत ने चीन को उसी की भाषा में जवाब देने की तैयारी में दक्षिण चीन सागर में बीजिंग के दबदबे को कम करने और पूर्वी एशियाई देशों के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को बेहतर बनाने के लिए जल्द ही एक नौसैनिक टास्क फोर्स भेजेगा।
दक्षिण चीन सागर में युद्धपोत की तैनाती से चीन के मानसिक तौर पर दबाव में आने की बात मानी जा रही है। चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है जबकि ब्रुनेई, फिलीपींस, मलेशिया और वियतनाम जैसे देश इसका विरोध करते हैं।
नौसेना ने बयान जारी कर बताया कि एक गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर और एक फ्रिगेट मिसाइल सहित चार जहाजों को दो महीने के लिए दक्षिण पूर्व एशिया, दक्षिण चीन सागर और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में तैनात किया जाएगा।
भारतीय जहाज गुआम के तट पर अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया भारत के साथ सालाना संयुक्त युद्ध अभ्यास में भाग लेंगे। ज्ञात हो कि भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका ने मिलकर क्वाड ग्रुप बनाया है, जिसका मुख्य उद्देश्य चीन की विस्तारवादी नीति पर लगाम लगाना है।
चीन, दक्षिण चीन सागर में अमेरिका सहित अन्य देशों द्वारा युद्ध अभ्यास की आलोचना करता आ रहा है। जून 2021 में यूएसएस रोनाल्ड रीगन के नेतृत्व में एक अमेरिकी विमान वाहक समूह नियमित मिशन पर दक्षिण चीन सागर पहुंचा था।
एक ब्रिटिश वाहक समूह इस महीने में फिलीपींस समुद्र में अभ्यास करने वाला है। इस तैनाती का मकसद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में अपनी स्थिति को मजबूत करना माना जा रहा है।
aनौसेना ने जारी बयान में बताया है कि नौसेना कार्य समूह में मिसाइल विध्वंसक रणविजय, मिसाइल फ्रिगेट शिवालिक, पनडुब्बी रोधी जंगी जहाज कदमत और मिसाइल से लैस जंगी जहाज कोरा शामिल हैं।
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