हाथरस की घटना को लेकर पूरे देश में आक्रोश है. इस हैवानियत के लिए शब्द भी कम है. मगर उत्तर प्रदेश की पुलिस इस मामले को लेकर शुरू से ही असंवेदनशील बनी हुई है. यूपी पुलिस ने बिना परिवार की अनुमति के पीड़िता की लाश का अंतिम संस्कार कर दिया. यही नहीं, असंवेदनशीलता की हद तो तब पार हो गई जब एक तरफ हाथरस की ‘निर्भया’ की की लाश जल रही थी वहीँ दूसरी तरफ यूपी पोलिस क जवाब ठहाके लगाकर है रहे थे, मुस्कुरा रहे थे. इससे यह साफ़ ज़ाहिर होता है की इस केस को लेकर पुलिस कितनी सीरियस है.
मंगलवार को गैंगरेप पीड़िता ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया था. उसके बाद भारी पुलिस बल के साथ उसका शव लेकर फाॅर्स गाँव पहुंची मगर भीड़ को देखते हुए पुलिस ने खुद ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया. परिवार की तरफ से जारी बयान में कहा गया है की वह पुलिस से शव को न जलाने की गुहार करते रहे मगर पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी. उन्हें अंतिम बार पीड़िता का चेहरा भी नहीं देखने दिया गया.
यही नहीं, इससे पहले भी जब यह मामला सामने आया था, पहले तो पुलिस ने मामला ही दर्ज़ करने से मना कर दिया था. जैसे-तैसे जब मामले दर्ज हुआ तो 8 दिनों तक FIR में रेप की धारा नहीं जोड़ी गई. जब मामला दर्ज हो गया तो आरोपियों की गिरफ्तारी करने में देरी की गई. हालांकि दबाव बढ़ने पर पुलिस ने चरों आरोपियों को हिरासत में तो ले लिया मगर उसका असंवेदनशील चेहरा सब सामने आ गया.
वहीँ पुलिस अपनी पीठ थपथप्ने से नहीं चूक रही. उसका कहना है की चारों आरोपियों को पकड़ लिया गया है और जल्द से जल्द उन्हें सजा दिलवाकर रहेंगे.
