पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) अपने सबसे बुरे आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है. उसकी माली हालत इतनी खराब है की अब उसके पास अपने खिलाड़ियों और अधिकारियों के कोरोना टेस्ट करवाने के पैसे भी नहीं बचे है. आपको शायद ये बाद हज़म नहीं हो रही हो मगर ये हकीकत है.

पाकिस्तान के रावलपिंडी में 30 सितम्बर से नेशनल टी-20 चैम्पियनशिप की शुरुआत होनी है. उसके लिए चैंपियनशिप में भाग ले रहे सभी खिलाड़ियों और अधिकारीयों के कोरोना टेस्ट होने अनिवार्य है. मगर PCB ने खिलाड़ियों को साफ़ तौर पर कह दिया है की अपनी-अपनी जांच का खर्चा वह स्वयं उठाये. अगर
ज़रूरत पड़ी तो दूसरे कोरोना टेस्ट का खर्च बोर्ड उठाएगा.

पैसो की कमी के चलते अब PCB ने अपने कर्मचारियों को भी निकलना शुरू कर दिया है. भास्कर में छपी एक खबर के अनुसार हाल ही में उसने अपने 5 कर्मचारियों को निकाला है और एक लिस्ट भी तैयार कर ली है जिसमें खराब परफॉरमेंस वालों को बाहर का रास्ता दिखाया जायेगा. PCB सूत्रों के अनुसार
अगर बोर्ड की आर्थिक स्तिथि नहीं सुधरी तो इससे 2-3 साल में इसे बंद करने की नौबत आ सकती है.

क्रिकेट एक्सपर्ट्स PCB की इस दयनीय हालत के पीछे देश में घरेलु क्रिकेट टूर्नामेंट्स के न होने का हवाला दे रहे है. यही नहीं, भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले काफी अरसे से किसी सीरीज का न खेले जाना भी एक कारण के तौर पर देखा जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भारत-पाकिस्तान के बीच सीरीज नहीं होने से पीसीबी को करीब 90 मिलियन डॉलर (करीब 663 करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ है. भारत-पाक के बीच आखिरी बार 8 साल पहले भारत में द्विपक्षीय सीरीज खेली गई थी जिसमें पाकिस्तान 2-1 से विजयी रहा था.