बिहार निवासी अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के तथाकथित आत्महत्या मामले में हर दिन एक नया खुलासा और नया विवाद जुड़ता चला आ रहा है। कभी दो सरकारों के बीच तो कभी दो राज्यों की पुलिस टीम के बीच जम कर बयानबाजी सामने आ रही है। इसी क्रम में शिवसेना नेता संजय राउत की टिप्पणी पर बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने एक बार फिर से शायरी से जवाब दिया है। यह कोई पहला मौका नही जब बिहार डीजीपी ने शायरी से जवाब दिया है। इससे पहले भी वह एक शायरी ट्वीट कर संजय राउत को जवाब दे चुके हैं। 9 और 10 अगस्त को किए ट्वीट में डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय ने लिखा 

बता दें कि संजय राउत ने कहा था, बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे समाचार चैनलों पर खाकी वर्दी में जाकर मुंबई पुलिस की कार्य पद्धति पर जोश में बोलते हैं। समाचार चैनल पर चर्चा में शामिल होते हैं। यह सीधे-सीधे पुलिसिया अनुशासन का उल्लंघन है। उस पर इस गुप्तेश्वर पांडे से अनुशासन के पालन की उम्मीद ही क्यों की जाए?

राउत ने डीजीपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, ये गुप्तेश्वर पांडे कौन हैं? वर्ष 2009 में वे डीआईजी रहते हुए पुलिस सेवा से वीआरएस लेकर सीधे राजनीति में कूद गए। विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर ‘बक्सर’ निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए खड़े हो गए लेकिन भाजपा के सांसद लालमुनि चौबे द्वारा बगावत की धमकी दिए जाने के साथ ही चौबे की उम्मीदवारी फिर बरकरार कर दी गई. इससे गुप्तेश्वर पांडे बीच में ही लटक गए। उनकी अवस्था ‘न घर के न घाट के’ जैसी हो गई। इस तरह से राजनीति में घुसने का उनका मिशन फेल हो गया। उसके बाद उन्होंने सेवा में लौटने के लिए फिर आवेदन-निवेदन किए।

राउत ने कहा, पांडे पहले भाजपा के खेमे में थे और आज नीतीश कुमार के खास हैं। भाजपा से उम्मीदवारी स्वीकार करनेवाले पांडे की मुंबई पुलिस की कार्य क्षमता पर सवाल खड़े करना हास्यास्पद है। उस पर अब ऐसी खबरें बिहार के अखबारों में छपी हैं कि पांडे शाहपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से आगामी विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। खबरों में ऐसा भी कहा गया है कि उनके सेवाकाल में 6 महीने बचे हैं, लेकिन वह इस्तीफा दे सकते हैं और जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। राउत ने कहा ऐसी पुलिस से समाज को क्या अपेक्षा रखनी चाहिए?

गौरतलब है कि संजय राउत ने रविवार को शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में सुशांत को लेकर लिखा कि सुशांत के अपने पिता से मधुर संबंध नहीं थे। इसके अलावा उन्होंने अंकिता लोखंडे पर भी निशाना साधा। उन्होंने लिखा इस मामले की भी जांच होनी चाहिए कि अंकिता ने सुशांत को क्यों छोड़ा था? अपने लेख में संजय ने यह भी कहा कि  सुशांत के पिता से हमदर्दी है, लेकिन ऐसी कई चीजें हैं जो सामने आनी चाहिए। इन्ही विवादों के बीच डीजीपी भी लगातार बिना नाम लिए जवाब दे रहे हैं और सुशांत को न्याय दिलाने की बात दोहराते रहे हैं।