सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए “स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट” पर भारत ने पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और सऊदी अरब के बीच गहरी रणनीतिक साझेदारी है और “हमारी उम्मीद है कि इस साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए सऊदी हमारे आपसी हितों और संवेदनशीलताओं का ध्यान रखेगा।”
यह समझौता, जिस पर बुधवार को पाक पीएम शहबाज़ शरीफ़ और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हस्ताक्षर किए, कहता है कि “किसी एक देश पर आक्रामकता दोनों देशों पर आक्रामकता मानी जाएगी।”
भारत ने गुरुवार को शुरुआती प्रतिक्रिया में साफ किया था कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए हर ज़रूरी कदम उठाएगा।
जब प्रवक्ता से यह पूछा गया कि क्या यूएई और क़तर जैसे देश भी इस समझौते का हिस्सा बन सकते हैं, तो उन्होंने बताया कि भारत के इन देशों से भी व्यापक और मजबूत रिश्ते हैं। हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी ने क़तर के अमीर से बातचीत की थी और यूएई के विदेश मंत्री स्तर के प्रतिनिधि भी दिल्ली आए थे।
पाक-सऊदी बयान के मुताबिक, यह समझौता दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मज़बूत करेगा और “किसी भी आक्रामकता के खिलाफ साझा प्रतिरोध” की दिशा में काम करेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह समझौता भले नया दिखे, लेकिन दरअसल यह पुरानी सुरक्षा व्यवस्थाओं को औपचारिक रूप देने जैसा है, जिसमें पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी को सैन्य जनशक्ति और विशेषज्ञता उपलब्ध कराता रहा है।
