मध्य-पूर्व में दो साल से जारी जंग के बीच आखिरकार एक बड़ी उम्मीद जगी है। अमेरिका की मध्यस्थता में इज़राइल और हमास के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ है, जिसके तहत गाज़ा में बंधक बनाए गए लोगों की रिहाई और इज़रायली सैनिकों की चरणबद्ध वापसी का रास्ता खुला है।
भारत ने इस समझौते का गर्मजोशी से स्वागत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हम राष्ट्रपति ट्रंप की शांति योजना के पहले चरण पर हुए समझौते का स्वागत करते हैं। यह प्रधानमंत्री नेतन्याहू के मजबूत नेतृत्व का प्रतीक है। हमें उम्मीद है कि इससे गाज़ा के लोगों को राहत मिलेगी और स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त होगा।”
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे “राजनयिक सफलता और राष्ट्रीय विजय” बताया। उन्होंने कहा, “हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक सभी बंधक घर नहीं लौट आते। राष्ट्रपति ट्रंप की दृढ़ प्रतिबद्धता और सहयोग से हमने यह निर्णायक मोड़ हासिल किया है।”
इस समझौते के तहत हमास जल्द ही सभी बंधकों को रिहा करेगा, जबकि इज़राइल अपनी सेनाओं को सहमति-रेखा से पीछे हटाएगा। बदले में, हमास ने अपनी कैद में रखे 47 बंधकों की रिहाई की सूची सौंपी है। गाज़ा की धरती पर अब उम्मीद का एक नया सवेरा दिख रहा है — युद्ध की राख से शांति की किरण उभर रही है।
