ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबट ने कहा है कि आने वाले 40-50 वर्षों में भारत का प्रधानमंत्री “फ्री वर्ल्ड” (स्वतंत्र दुनिया) का नेता बन सकता है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी भारत की सदी है और भारत अब वैश्विक महाशक्ति बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
एबट ने कहा, “भारत लोकतांत्रिक ताकत है, जहाँ कानून का राज और अंग्रेज़ी भाषा तीन बड़ी ताकतें हैं। भारत अब चीन का असली लोकतांत्रिक विकल्प बन सकता है।” उन्होंने भारत से आग्रह किया कि वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन बनाए और ऑस्ट्रेलिया जैसे लोकतांत्रिक देशों के लिए “मजबूत, विश्वसनीय साझेदार” बने।
उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) जैसे कदम दिखाते हैं कि लोकतांत्रिक दुनिया अब चीन पर निर्भरता घटा रही है।
चीन पर तीखा प्रहार करते हुए एबट ने कहा, “बीजिंग विश्व पर वर्चस्व चाहता है, और यही उसके पड़ोसी देशों के लिए सबसे बड़ा खतरा है।” उन्होंने ताइवान पर संभावित तनाव को लेकर चेतावनी दी कि सभी लोकतांत्रिक देशों को तैयार रहना चाहिए, क्योंकि “कमज़ोरी उकसाती है।”
रूस-यूक्रेन युद्ध पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि अगर यूक्रेन NATO का सदस्य होता, तो “रूसी आक्रमण कभी नहीं होता।”
अमेरिका पर टिप्पणी करते हुए एबट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने भारत पर तेल आयात को लेकर जो 25% टैरिफ लगाया, वह “रणनीतिक भूल” थी, जबकि असली चुनौती चीन से है।
