लालू प्रसाद यादव ने 90 के दशक में बिहार को एक समीकरण दिया था जिसके बलबूते लालू ने बिहार में अपने दम पर 15 सालों तक राज किया. वो समीकरण था मुस्लिम-यादव (M-Y) वोटों के समीकरण का.
भले ही अब आरजेडी पिछले 15 सालों से सत्ता से सत्ता से बाहर हो मगर इस समीकरण ने कभी लालू का साथ नहीं छोड़ा. चाहे लालू हारे या जीते, यह समीकरण हमेशा उनके साथ खड़ा रहा.
मगर इस बार पहली बार पिछले 30 सालों में लालू बिहार विधानसभा चुनाव में दिखाई नहीं देंगे. लालू की गैरहाज़िरी में M-Y समीकरण को साधने का सारा ज़िम्मा तेजस्वी यादव पर होगा.
तेजस्वी यादव RJD की तरफ से मुख्यमंत्री पद के दावेदार है. तेजस्वी सबसे पहले 2015 में विधायक बने थे. मगर 2017 में लालू के जेल जाने के बाद से वह अकेले ही पार्टी का भार संभाल रहे है.
पार्टी ने तेजस्वी की अगुवाई में 2019 का लोकसभा इलेक्शन लड़ा था जिसमें RJD की बुरी तरह हार हुई थी. मगर इन सबके बावजूद भी M-Y समीकरण लालू की पार्टी के साथ खड़ा रहा. मगर इस बार ऐसा नहीं है. पार्टी के कई बड़े नेता तेजस्वी का साथ छोड़ चुके है और कई बड़े नेता नाराज़ चल रहे है.
लालू की अनुपस्तिथि में M-Y समीकरण के किले पर NDA और दूसरी पार्टियों की नज़र है. इस किले को ध्वस्त करने का वह मौका तलाश कर रहे है. इसमें नितीश कुमार यादव, पप्पू यादव और असदुद्दीन ओवैसी सबसे आगे है.
असदुद्दीन ओवैसी बिहार में RJD का खेल बिगाड़ सकते है. ओवैसी ने बसपा, उपेंद्र कुशवाहा, देवेंद्र यादव के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है.
अगर ओवैसी ने मुस्लिम बहुतायत सीटों पर कैंडिडेट खड़े किये तो यह तेजस्वी के लिए मुश्किल साबित हो सकती है.
वहीँ एनडीए ने लालू के मूल वोटबैंक में सेंधमारी की खास रणनीति बनाई है. बीजेपी भूपेंद्र यादव जैसे रणनीतिकार के जरिए 2019 के लोकसभा चुनाव में यादव समुदाय के वोट बैंक में कुछ हद तक सेंधमारी करने में कामियाब रही थी. इस बार भी NDA वही दोहराने की कोशिश करेगी.
पप्पू यादव-SDPI की नजर यादव-मुस्लिम वोट पर
जन अधिकार पार्टी के प्रमुख पप्पू यादव ने भी चंद्रशेखर आजाद की पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है. पप्पू यादव की नज़र भी लालू की अनुपस्तिथि में RJD के M-Y समीकरण पर है.
बिहार में मुस्लिम और यादवो का 16-16 प्रतिशत वोट बैंक है और करीब 100 सीटें तो ऐसी है जहां इस समीकरण का सीधा असर पड़ता है. यही वजह है की सभी पार्टिया इस समीकरण को साधने में लगी हुई है.
वैसे तो तेजस्वी यादव नितीश कुमार के सामने काफी युवा नेता है मगर M-Y समीकरण तेजस्वी के साथ ऐसे ही खड़ा रहा तो नितीश कुमार को खासी दिक्कत पैदा हो सकती है.
