नेशनल मोनेटाइजेशन प्लान को लेकर मचा रार- राहुल के बयान अपर निर्मला का पलटवार

नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन को लेकर राहुल गांधी ने मंगलवार को मोदी सरकार पर निशाना साधा तो केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल पर पलटवार कर दिया। सीतारमण ने पूछा कि क्या राहुल गांधी मौद्रिकीकरण के बारे में जानते हैं? साथ ही पार्टी पर आरोप लगाया कि कांग्रेस ने देश के संसाधनों को बेचकर 8,000 करोड़ रुपये की रिश्वत प्राप्त की थी।

वित्त मंत्री ने बुधवार को मुंबई में संवाददाताओं के साथ बातचीत में समझाया कि नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन के तहत सरकार संपत्तियों का स्वामित्व नहीं देगी। उन संपत्तियों को अनिवार्य रूप से सरकार को वापस सौंप दिया जाएगा, एक भी संपत्ति बेची नहीं जाएगी।

संपत्तियों को लीज पर दिया जाएगा और फिर उसका स्वामित्व अनिवार्य रूप से वापस लिया जाएगा।

राहुल गांधी की उस घटना को याद किया जहां उन्होंने सहमत नहीं होने पर अध्यादेश की प्रति को फाड़ दिया था। इसपर निर्मला सीतारमण ने पूछा कि “राहुल गांधी ने रेलवे स्टेशन को पट्टे पर देने के प्रस्ताव संबंधी दस्तावेज को क्यों नहीं फाड़ दिया?”

मंत्री ने तीखे सवालों के बीच आगे कहा कि “अगर वह वास्तव में मौद्रिकरण के खिलाफ हैं, तो उन्होंने एनडीएलएस के मौद्रिकरण के आरएफपी को क्यों नहीं फाड़ दिया? अगर यह मौद्रिकरण है, तो क्या उन्होंने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन को बेच दिया? क्या अब इसका स्वामित्व ‘जीजाजी’ के पास है?’ सीतारमण ने आरोप लगाया कि यह कांग्रेस ही थी जिसने जमीन और खदान जैसे संसाधनों को बेचने पर ‘रिश्वत’ हासिल की।

उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का मौद्रिकरण करके 8,000 करोड़ रुपये जुटाए, और 2008 में इसी सरकार ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन को पट्टे पर देने के लिये अनुरोध पत्र आमंत्रित किया था।

मंत्री ने कांग्रेस पार्टी को राष्ट्रमंडल खेलों की याद भी दिलाई। निर्मला सीतारमण ने दोहराया कि संपत्ति मौद्रिकरण योजना में संपत्ति को बेचना शामिल नहीं है, और संपत्ति सरकार को वापस सौंप दी जाएगी।

गौरतलब हो कि नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन प्‍लान बहुत सारे सेक्‍टर्स को कवर करेगा जिनमें रोड, रेलवे, एयरपोर्ट से लेकर पावर ट्रांसमिशन लाइन्‍स और गैस पाइपलाइंस भी शामिल हैं। इसके तहत भारत सरकार ने अगले चार साल में 6 लाख करोड़ रुपये जुटाने का टारगेट तय किया है जो कोरोना के असर से जूझ रही अर्थव्यवस्था में नए निवेश के लिए फंड जुटाने की नई कवायद के तहत होगी।

इस नई कवायद के तहत हर मंत्रालय के लिए सालाना टारगेट तय किए गए हैं। सड़क, ट्रांसपोर्ट और राजमार्ग, रेलवे, पॉवर, सिविल एविएशन, पोर्ट, टेलिकॉम जैसे सेक्टरों के 12 मंत्रालयों पर फोकस रहेगा। इस योजना के तहत भारतीय रेल के 400 रेलवे स्टेशन, पैसेंजर ट्रेन, रेलवे स्टेडियम, 25 एयरपोर्ट, नौ बड़े पोर्ट और खेल मंत्रालय के अधीन दो बड़े नेशनल स्टेडियम की पहचान की गई है।

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