चुनाव से पहले मांझी की नीतीश को सलाह- “शराबबंदी में थोड़ी ढील दीजिए”

बिहार की सियासत में शराबबंदी का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस सख़्त नीति पर अब उनके सहयोगी जीतन राम मांझी ने ही सवाल उठा दिए हैं।

मांझी ने कहा कि शराबबंदी का असली निशाना शराब माफिया होने चाहिए, न कि छोटे-छोटे उपभोक्ता। उन्होंने मीडिया से कहा, “पुलिस उन गरीबों को पकड़ती है जो थोड़ी-सी शराब पीते हैं। जबकि हज़ारों लीटर बनाने और बेचने वालों पर कोई कड़ा एक्शन नहीं होता। नीतीश कुमार ने खुद कहा था कि थोड़ी मात्रा में शराब रखने वालों को न पकड़ा जाए।”

मांझी का यह बयान चुनावी मौसम में नीतीश कुमार को असहज कर सकता है। विपक्ष पहले ही आरोप लगा चुका है कि शराबबंदी कानून गरीबों, दलितों और पिछड़ों पर पुलिसिया उत्पीड़न का हथियार बन चुका है।

तेजस्वी यादव का कहना है कि “99% गिरफ्तार लोग दलित, ओबीसी और आदिवासी हैं, जबकि असली कारोबारी बच जाते हैं।”
वहीं, प्रशांत किशोर ने घोषणा की है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो “एक घंटे में शराबबंदी हटा देंगे।”

एनडीए के भीतर भी इस कानून पर मतभेद सामने आ रहे हैं। लोजपा (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने कहा था कि “ताड़ी को शराब नहीं माना जाना चाहिए।”

चुनाव से ठीक पहले सहयोगियों के तेवर नीतीश कुमार के लिए चुनौती खड़ी कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *