बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर तारीखों का एलान हो चुका है और पहले चरण के मतदान से पहले उम्मीदवारों के नामांकन से संबंधित अधिसूचना जारी की जा चुकी है। नामांकन में भी महज 3 दिन का वक़्त बाकी है लेकिन दलों और गठबंधनों में अब भी रूठने-मनाने और टूटने का दौर जारी है। महागठबंधन में इन सब से पहले जहां जीतनराम मांझी गए, बाद में उपेंद्र कुशवाहा गए वहीं कल वीआईपी के मुकेश सहनी भी साथ छोड़ गए। अब हालांकि महागठबंधन में मची भगदड़ थम गई है और सीटों के बंटवारे पर सहमति भी बन गई है।
यह हाल सिर्फ महागठबंधन के ही नही रहा, ऐसी ही कमोबेश स्थिति एनडीए की भी है। चिराग पासवान के तेवर और उनकी मांग को देखते हुए यह अंदाजा तो था कि वह इस बार आर-पार के मूड में हैं लेकिन स्थिति कब स्पष्ट होगी इस बात का इंतजार था। आज वह वक़्त भी आ गया जब लोजपा की तरफ से एनडीए पूरा तो नही लेकिन एनडीए के चेहरा और बिहार में बड़े भाई की हैसियत रखने वाली जदयू के साथ को छोड़ने का एलान कर दिया।

इसका मतलब यह है कि अब लोजपा बिहार विधानसभा चुनावों में नीतीश के दल जदयू के खिलाफ न सिर्फ उम्मीदवार उतारेगी बल्कि उनके खिलाफ वोट भी मांगेंगी। खास बात यह है कि बीजेपी जहां एक तरफ जदयू के साथ बनी रहेगी वहीँ दूसरी तरफ उसका केंद्र में लोजपा के साथ गठबंधन पहले की तरह जारी रहेगा। साफ आसान भाषा मे समझें तो बीजेपी के खिलाफ चिराग नही जाएंगे और चिराग के खिलाफ बीजेपी का लेना देना नही होगा।
आंशिक रूप से एनडीए छोड़ने का यह फैसला आज शाम लोजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में लिया गया। बैठक में प्रस्ताव पास हुआ कि लोजपा के सभी विधायक, पीएम मोदी के हाथों को और मज़बूत करेंगे। बैठक में एक साल से बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट के माध्यम से उठाए गए मुद्दों पर लोजपा पीछे हटने को तैयार नहीं है। वह इन चुनावों में नीतीश के चेहरे के खिलाफ वोट मांगने उतरेगी।
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