बिहार विधानसभा चुनावों की तारीखों के ऐलान के साथ ही टिकट की चाह रखने वाले नेताओं की पटना और दिल्ली दरबार की दौड़ शुरू हो चुकी है। हालांकि कोरोना काल मे लड़े जाने वाले इस चुनाव में हर दल के पास सीटों की संख्या जहां सीमित है वहीं एक अनार और सौ बीमार हैं।
ऐसा इसलिए है क्योंकि हर दल के पास हर सीट के लिए औसतन 200 से लेकर 1000 तक आवेदन आए हैं।
राजद, जदयू, बीजेपी और कांग्रेस सभी दलों ने संभावित दावेदारों से बॉयोडाटा जमा करने की बात कही थी। इसके बाद तो जैसे होड़ लग गई। पिछले एक महीने से लगातार आवेदन लिए जा रहे थे।
अब जदयू-राजद की तरफ से बॉयोडाटा जमा लेने का काम बंद कर दिया गया है और अभी तक जमा किये गए आवेदनों की सॉफ्ट कॉपी शीर्ष नेताओं को सौंप दी गई है। वहीं बीजेपी के लिए भी सरदर्दी बनी हुई है।
यहां हर दिन हजारों की संख्या में नेता अपना बॉयोडाटा जमा कर दावा ठोकने पहुंच रहे हैं। वहीं कांग्रेस में भी लगभग 650 संभावित उम्मीदवारों ने अपने बॉयोडाटा जमा कराए हैं। इससे कांग्रेस भी गदगद है।
बॉयोडाटा जमा कराने वाले नेता जहां सीट की चाह लिए पहुंच रहे वहीं दलों के बीच इससे एक तरफ जहां उत्साह है और इसे जनसमर्थन से जोड़ कर देखा जा रहा वहीं इस बात की आशंका से भी इंकार नही की जहां जितने ज्यादा असंतुष्ट होंगे वहां खेल उतना खराब होगा।
इसके अलावा इस बार का चुनाव पारंपरिक तौर से अलग है इसलिए सोशल मीडिया से आमलोगों के बीच एक्टिव रहने वाले नेताओं की भी तलाश है और यह एक अनिवार्य योग्यता है। साथ ही हर दल से सिटींग एमएलए को ही टिकट मिलने के आसार हैं इसलिए नए उम्मीदवारों के हाथ हर दल से गिनती की सीटें ही आएंगी।
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