19 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के दौरान किसान संगठनों ने अपने आंदोलन को फिर से तेज करने का ऐलान कर दिया है।
किसान संगठनों का कहना है कि सत्र खत्म होने तक उनके 200 प्रतिनिधि रोज नई दिल्ली में इकट्ठा होंगे और संसद का घेराव करते रहेंगे जब तक उनके मुद्दे को सुलझाया नहीं जाता। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस हाई अलर्ट पर है। नई दिल्ली में सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं।
संसद भवन के आसपास कहीं पर भी ज्यादा लोग जमा न हो पाएं, इसका ध्यान रखा जा रहा है। नई दिल्ली जिले के डीसीपी दीपक यादव के अनुरोध पर डीसीपी (मेट्रो) जितेंद्र मणि ने दिल्ली मेट्रो के चीफ सिक्योरिटी कमिश्नर को एक पत्र लिखकर कहा है कि सुरक्षा कारणों के चलते संसद सत्र के दौरान नई दिल्ली इलाके में मेट्रो स्टेशनों को बेहद शॉर्ट नोटिस पर किसी भी वक्त बंद कराने की जरूरत पड़ सकती है।
इसे देखते हुए वे भी अपनी तरफ से सभी जरूरी इंतजाम करें और अपने स्टाफ को अलर्ट पर रखें। डीसीपी ने लेटर में 7 मेट्रो स्टेशनों, जनपथ, लोक कल्याण मार्ग, पटेल चौक, राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, मंडी हाउस और उद्योग भवन का जिक्र किया है।
हालांकि सूत्रों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर बारखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, आईटीओ, खान मार्केट, शिवाजी स्टेडियम जैसे मेट्रो स्टेशन भी बंद कराए जा सकते हैं। जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने किसानों के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले रविवार को सिंघु बॉर्डर के पास किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की जिसके दौरान दिल्ली पुलिस की तरफ से किसानों को दिल्ली में प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की पेशकश की गई, जिसे किसान नेताओं ने ठुकरा दिया।
पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक के बाद किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा कि “हमने दिल्ली पुलिस को बताया है कि सिंघु बॉर्डर से हर दिन 200 लोग संसद तक मार्च करेंगे। प्रत्येक व्यक्ति के पास पहचान का बैज होगा।
हम सरकार को प्रदर्शनकारियों की सूची सौंपेंगे। पुलिस ने हमसे प्रदर्शनकारियों की संख्या कम करने को कहा, जिससे हमने मना कर दिया।”
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