प्रधानमन्त्री मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ से आज फिर देशवासियों के साथ जुड़े. यह रेडियो कार्यक्रम की उनकी 69वीं कड़ी थी. मन की बात में मोदी ने जहां कोरोना महामारी को हलके में लेने का संकल्प दोहराया वहीँ भारतीय सभ्यता में कहानियों की महत्वता को भी समझाया. प्रधानमंत्री ने कृषि विधेयक का जिक्र करते हुए कहा कि अब किसानों को अपनी फल-सब्जियां कहीं पर भी, किसी को भी बेचने की ताकत मिल गई है.
यहां पढ़ें प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की मुख्य बातें-
- कहानियों का इतिहास उतना ही पुराना है जितनी कि मानव सभ्यता। कहानियां, लोगों के रचनात्मक और संवेदनशील पक्ष को सामने लाती हैं, उसे प्रकट करती हैं। कहानी की ताकत को महसूस करना हो तो जब कोई माँ अपने छोटे बच्चे को सुलाने के लिए या फिर उसे खाना खिलाने के लिए कहानी सुना रही होती है तब देखें। मैं अपने जीवन में बहुत लम्बे अरसे तक एक परिव्राजक के रूप में रहा। घुमंत ही मेरी जिंदगी थी। हर दिन नया गांव, नए लोग, नए परिवार। साथियों, भारत में कहानी कहने की, या कहें किस्सागोई की, एक समृद्ध परंपरा रही है.
- दो गज की दूरी का नियम, आपको भी बचा सकता है, आपके परिवार को भी बचा सकता है। ये कुछ नियम कोरोना के खिलाफ लड़ाई के हथियार हैं, और हम ये ना भूलें कि जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं, आप स्वस्थ रहें, आपका परिवार स्वस्थ रहे, इसी शुभकामना के साथ बहुत बहुत धन्यवाद, नमस्कार।
- इस 12 अक्तूबर को राजमाता विजयाराजे सिंधिया जी की भी जयंती है। उन्होंने अपना पूरा जीवन, लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया। वैसे तो, उनके साथ बहुत सालों तक काम करने का मौका मिला कई घटना हैं।
- 02 अक्टूबर हम सबके लिए पवित्र और प्रेरक दिवस होता है । यह दिन माँ भारती के दो सपूतों, महात्मा गाँधी और लाल बहादुर शास्त्री को याद करने का दिन है।
- शहीद भगतसिंह पराक्रमी होने के साथ-साथ विद्वान भी थे, चिन्तक थे। अपने जीवन की चिंता किये बगैर भगतसिंह और उनके क्रांतिवीर साथियों ने ऐसे साहसिक कार्यों को अंजाम दिया, जिनका देश की आज़ादी में बहुत बड़ा योगदान रहा। हम भगत सिंह बन पायें या ना बन पायें, लेकिन, भगत सिंह जैसा देश प्रेम, देश के लिये कुछ कर-गुजरने का ज़ज्बा, जरुर, हम सबके दिलों में हो। शहीद भगत सिंह को यही हमारी सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।
- प्रधानमंत्री ने कहा कि, ‘हरियाणा के एक किसान भाई में मुझे बताया कि कैसे एक समय था जब उन्हें मंडी से बाहर अपने फल और सब्जियां बेचने में दिक्कत आती थी, लेकिन 2014 में फल और सब्जियों को APMC Act से बाहर कर दिया गया, इसका उन्हें और आसपास के साथी किसानों को बहुत फायदा हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि, हरियाणा के एक किसान भाई में मुझे बताया कि कैसे एक समय था जब उन्हें मंडी से बाहर अपने फल और सब्जियां बेचने में दिक्कत आती थी, लेकिन 2014 में फल और सब्जियों को APMC Act से बाहर कर दिया गया, इसका उन्हें और आसपास के साथी किसानों को बहुत फायदा हुआ।
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