सोशल मीडिया को एक बड़ा हथियार बनाया गया और इसके पीछे भी टैब के सीएम और अभी के पीएम मोदी का दिमाग था।उनके प्रचार का जिम्मा बेशक प्रशांत किशोर के पास था लेकिन यह फार्मूला कारगर रहा और बीजेपी सत्ता में आई। यहीं से शुरू हुआ भारतीय राजनीति में सोशल मीडिया का प्रभुत्व।
इसके महज एक पहलू पर गौर करें या यूं कहें कि कोई एक ऐसी उपलब्धि रही तो वह यह कि इज़के माध्यम से आम लोगों के सुझाव पीएम तक पहुंचे। आमलोगों की उपलब्धियां पीएम तक पहुंची और फिर पीएम के द्वारा वह भारत भर में पहुँची।
कृषि के लिए पानी की समुचित व्यवस्था आज भी नही है। सरकार ट्यूबवेल लगवाने या पम्प सेट खरीदने के नाम पर सब्सिडी देने की बात करती है, देती भी है लेकिन किसे यह नही पता क्योंकि जिन्हें यह मिलता है वह इसके वाजिब हकदार होते ही नही!
मन की बात पर आधारित जिन दो किताबों का लोकार्पण पिछले साल राष्ट्रपति रहे प्रणव मुखर्जी की अगुवाई में किया गया और जिस लेखक का जिक्र किया गया वह असल मे इसके लेखक हैं ही नही?