न ही उनके लिए पर्याप्त साधन की सुविधाएं थी, न ही खाने की वयस्था थी और न ही मेडिकल की. इसके चलते न जाने कितने प्रवासी मज़दूरों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था.
राजनीति में हर दल और नेता यही चाहता है कि किसी भी कीमत पर उसे ऐसी सीट मिले जहाँ से वह चुनाव जीत सके और जनता उसे स्वीकार कर सके। खास कर जब छवि को पहले से ठीक साबित करने की चुनौती और बड़बोलेपन से निपटने की चुनौती सामने हो तो यह और अहम हो जाता है।