32 अमृत परियोजनाएं पूरी हुईं – हिमाचल प्रदेश में कार्यान्वयन के तहत 41 परियोजनाएं

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) के सचिव श्री दुर्गा शंकर मिश्रा ने पिछले महीने हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों के मुख्य सचिव / प्रधान सचिव / वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान, अमृत (एएमआरयूटी) मिशन  के तहत राज्यों द्वारा की गई प्रगति की सराहना की।

उन्होंने मिशन और उनसे परियोजनाओं को शीघ्रता से लागू करने का अनुरोध किया ताकि लोगों तक अपेक्षित लाभ समय से पहुंचें। उन्होंने उन्हें 31 मार्च, 2021 तक विस्तारित मिशन अवधि के भीतर सभी परियोजनाओं को पूरा करने की सलाह दी ताकि केंद्रीय सहायता (सीए) का लाभ उठाया जा सके।

इन दो पहाड़ी राज्यों के मामले में केंद्रीय सहायता की राशि 90 प्रतिशत  है। बातचीत के दौरान, यह जानकारी दी गयी कि हिमाचल प्रदेश राज्य में 32 परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं और 41 परियोजनाएँ कार्यान्वित की जा रही हैं। उत्तराखंड में, 593 करोड़ रुपये की 151 परियोजनाएं शामिल की गई हैं। इनमें से 47 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 100 परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं।

इस दौरान यह जानकारी भी दी गयी कि हिमाचल प्रदेश अमृत की राष्ट्रीय रैंकिंग में 15वें और उत्तराखंड 24वें स्थान पर है। राज्यों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए, आवासन और शहरी कार्य सचिव ने उनसे अनुरोध किया कि वे अपने प्रदर्शन को सुधारने के लिए और प्रयास करें और सुनिश्चित करें जिससे वे शीर्ष 10 राज्यों में शामिल हो सकें।

हिमाचल प्रदेश ने 13,003 नए घरेलू पानी के नल के कनेक्शन के लक्ष्य के मुकाबले 17,600 से अधिक नए कनेक्शन प्रदान किये हैं। उत्तराखंड ने अब तक 36,554 पानी के नल के नए कनेक्शन प्रदान किए हैं। उत्तराखंड से अनुरोध किया गया कि वह कनेक्शनों को प्रदान करने के कार्य में तेजी लाए और लक्ष्य को शीघ्र पूरा करे।

आवासन और शहरी कार्य सचिव ने खराब प्लंबिंग के कारण पानी के रिसाव को रोकने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और प्लंबर की क्षमता निर्माण आदि का सुझाव दिया।

हिमाचल प्रदेश ने अब तक 23,006 कनेक्शनों के लक्ष्य के मुकाबले 26,034 सीवर कनेक्शन प्रदान किए हैं। उत्तराखंड ने 24,818 नए सीवर कनेक्शन दिए हैं। हिमाचल प्रदेश में 51,793 घरों को सेप्टेज प्रबंधन के तहत कवर किया गया है।

उत्तराखंड से मिशन अवधि के भीतर इस काम को पूरा करने के लिए सीवर कनेक्शन प्रदान करने के कार्य में तेजी लाने का अनुरोध किया गया था।

हिमाचल प्रदेश ने अब तक 9,621 स्ट्रीट लाइटों को एलईडी लाइटों में बदलने के लक्ष्य की तुलना में 12,186 स्ट्रीट लाइटों को एलईडी लाइटों में बदला है। उत्तराखंड ने 72,167 स्ट्रीट लाइटों की जगह 82,337 स्ट्रीट लाइटों को एलईडी में बदला है।

दोनों राज्यों से स्ट्रीट लाइटों को एलईडी लाइटों में बदलने के कार्य में तेजी लाने और इस प्रक्रिया को पूरे राज्य में विस्तारित करने का अनुरोध किया गया था।

दोनों राज्यों ने अपने मिशन शहरों में ओबीपीएस प्रणाली लागू की है। श्री दुर्गा शंकर मिश्रा ने कहा कि ओबीपीएस प्रणाली ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस ’का हिस्सा है और इसे मिशन शहरों से अलग सभी यूएलबी में लागू किया जाना चाहिए।

दोनों राज्यों के सभी मिशन शहरों में क्रेडिट रेटिंग का कार्य पूरा हो चुका है। प्रत्येक राज्य में एक मिशन शहर को निवेश ग्रेड रेटिंग (आईजीआर) भी प्राप्त हुई है।

दोनों राज्यों को आईजीआर से कम रेटिंग वाले शहरों के लिए क्रेडिट वृद्धि योजना पर काम करना चाहिए और आईजीआर शहरों के लिए फ्लोटिंग म्यूनिसिपल बॉन्ड्स पर विचार करना चाहिए।

मंत्रालय द्वारा दोनों राज्यों को सूचित किया गया था कि  मंत्रालय के सभी मिशनों के लिए एक आम डैशबोर्ड विकसित किया है जहां सभी राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों और शहरों से संबंधित जानकारी उपलब्ध होगी।राज्य / केंद्रशासित प्रदेश प्रगति की निगरानी के लिए इस सुविधा का उपयोग कर सकते हैं।

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय सचिव ने राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों से अनुरोध किया कि वे मिशनों का विवरण नियमित रूप से अपडेट करें ताकि पोर्टल / डैशबोर्ड में प्रगति को नवीनतम किया जा सके। इस डेटा का उपयोग विभिन्न राज्यों के बीच प्रगति की मासिक रैंकिंग की निगरानी, ​​समीक्षा और मूल्यांकन के लिए किया जाता है।

कैच द रेन” अभियान: दोनों राज्यों से “कैच द रेन” अभियान के तहत गतिविधियों को शुरू करने का अनुरोध किया गया था। आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय सचिव ने पानी के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अभियान का उद्देश्य पानी की प्रत्येक बूंद का संरक्षण करना है। इस अभियान में शहरों की सभी इमारतों में वर्षा जल संचयन को शामिल करना है। इस कार्य को तुरंत लागू किया जाना चाहिए। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *