छेड़छाड़ के मामले में महिला शिक्षामित्र द्वारा प्रधानाध्यापक को चप्पल से दौड़ाकर पीटने का वीडियो हुआ वायरल

सिद्धार्थनगर की इटवा तहसील के एक सरकारी प्राइमरी स्कूल में महिला शिक्षामित्र द्वारा प्रधानाध्यापक पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाने का मामला सामने आया है जिसका संज्ञान लेकर बीएसए ने जांच के आदेश दिये हैं।

शिकायत के अनुसार आगरडीह प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक मनोज कुमार ने गुरुवार सुबह शिक्षामित्र को अपने कार्यालय में बुलाया और उसे परेशान करने की कोशिश की और महिला द्वारा इस हरकत का विरोध किए जाने पर अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए उसे कार्यालय से भगा दिया।

इस पर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें प्रधानाध्यापक को स्कूल परिसर में दौड़ते हुए देखा जा सकता है और शिक्षामित्र हाथ में सैंडल लिए उनके पीछे दौड़ रही है।

महिला शिक्षामित्र द्वारा बताया गया कि आए दिन उसके साथ छेड़छाड़ होती रहती थी। इसका विरोध करने पर उसके उपर गालियों, जाति सूचक अपशब्दों का प्रयोग किया जाता था और नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती रही।

वहीं वायरल वीडियो के बारे में जानकारी देते हुए उसने कहा कि उस दिन का मामला यह था कि सुबह 9 बजे आने के बाद उसे रजिस्टर लेकर बुलाया गया। जब रजिस्टर लेकर वह अंदर गई तो प्रधानाध्यापक ने उसका हाथ पकड़ लिया गया और कहा “तुम्हें रजिस्टर में साइन नहीं करने दूंगा” महिला ने आरोप लगाते हुए आगे बताया कि इसके बाद प्रधानाध्यापक रजिस्टर फेंक कर गाली देते हुए बाहर निकल गए।

गाली सुनने के बाद उसने प्रधानाध्यापक को चप्पल से पीटना शुरू कर दिया। मामले की शिकायत के बारे में महिला ने बताया कि इसकी शिकायत बीएसए व शिक्षा मंत्री से की गई है।

वहीं शिक्षा विभाग का बयान आया कि शिक्षा क्या किसी भी विभाग में ऐसे मामले नहीं होने चाहिए।

अब खबर आ रही है कि शिक्षाविभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू करते हुए दो शिक्षकों को निलंबित कर, महिला शिक्षामित्र का वेतन अग्रिम आदेश तक रोक दिया है।

वहीं प्रभारी प्रधानाध्यापक मनोज यादव के ऊपर शिक्षामित्र से छेड़छाड़ करने एवं जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करना, शिक्षा विभाग की छवि को धूमिल करने सहित कई आरोप लगाते हुए बीआरसी, भनवापुर से संबद्ध किया गया है।

सहायक अध्यापक तेजपाल को महिला शिक्षामित्र से हुए विवाद का वीडियो बनाने एवं उसे वायरल करने, उपस्थित पंजिका पर फर्जी हस्ताक्षर बनाने, प्रभारी प्रधानाध्यापक के साथ मारपीट करने एवं सहायक अध्यापकों व उच्च अधिकारियों पर अभद्र भाषा का प्रयोग करने जैसे कई गंभीर आरोपों पर निलंबित किया गया है।   

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