केजरीवाल के रोजगार से संबंधित दावे की क्या है हकीकत? क्यों लपेटे में आए दिल्ली सीएम?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इन दिनों कई अलग अलग राज्यों के तूफानी दौरे पर हैं। विपश्यना से कोटे केजरीवाल कभी गोवा तो कभी उत्तराखंड में नजर आते हैं। वह कहीं तिरंगा यात्रा निकाल रहे तो कहीं चर्च और मंदिर की राजनीति भी कर रहे हैं।

इन सब के बीच केजरीवाल लोगों से कुछ वादे भी कर रहे हैं। उत्तराखंड, गोवा और पंजाब के अपने पहले दौरे के दौरान केजरीवाल ने जहां मुफ़्त बिजली देने संबंधी घोषणा की वहीं अब वह रोजगार से संबंधित बड़े वादे कर रहे हैं।


केजरीवाल उत्तराखंड और गोवा में रोजगार की बात कर रहे हैं। उन्होंने गारन्टी देते हुए कहा कि हर बेरोजगार को रोजगार देंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इसके लिए उन्होंने पूरा होमवर्क किया है।

हालांकि केजरीवाल ने दिल्ली में पिछले 6 साल के शासन में कितने लोगों की नौकरी दी यह बात वह कहीं नही कर सके। इसके अलावा उन्होंने बेरोजगारी भत्ता देने संबंधी लोकलुभावन वादे भी किये हैं। ऐसे में आइये जानें कि दिल्ली में रोजगार को लेकर केजरीवाल सरकार का रिपोर्ट कार्ड क्या कहता है?


दरअसल हाल ही में आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक केजरीवाल सरकार ने अपने छह साल के कार्यकाल में 400 से भी कम लोगों को नौकरी और बेरोजगारी भत्ता दिया है। आलम यह है कि पिछले दो साल में महज 28 लोगों को नौकरी दी गई।

जबकि उससे पहले 378 लोगों को 4 साल में नौकरी मिली। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि दिल्ली में 6 साल सत्ता में रहते क्या यह आंकड़े केजरीवाल के दावों की तस्दीक करते हैं?
अब सोशल मीडिया पर जहां आमलोग इस मुद्दे को लेकर केजरीवाल पर हमलावर हैं वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल भी अब केजरीवाल के वादे को झूठ और बकवास बता रहे हैं।

वहीं जब मामले ने तूल पकड़ा तो आम आदमी पार्टी की तरफ से सफाई दी गई और कहा गया कि शब्दों के खेल की वजह से आरटीआई में गलत जानकारी मिली है। यह झूठ है। साथ ही यह दावा भी किया गया कि रोजगार मेले और वेब पोर्टल के माध्यम से एक लाख से ज्यादा लोगों को नौकरी दी गई।

इसके अलावा स्वरोजगार की भी बात की गई। हालांकि यह बयान अपना बचाव करने से ज्यादा कुछ नही है। यह स्पष्ट है कि बड़े-बड़े दावे और आंकड़ों के बीच फासला बहुत बड़ा है।

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