बिहार विधानसभा चुनावों के एलान के बाद से जिले में उम्मीदवारों और गठबंधन पर तमाम चर्चाएं हुईं। इन चर्चाओं में कई नाम उभरे लेकिन जैसे जैसे वक़्त बितता गया यह साफ होता गया कि बाँका जिले की कौन सी सीट किसके हिस्से आएगी और कौन उम्मीदवार होगा।
अब गठबंधन और उम्मीदवार तय हैं। इस जिले में जीत या हार से ज्यादा प्रतिष्ठा और साख की लड़ाई है। आइए बताएं कि किस सीट पर किसकी इज्जत दांव पर है और क्यों?
कटोरिया- यह सुरक्षित सीट है। फिलहाल यह सीट राजद के कब्जे में है। यहां से स्वीटी सीमा हेम्ब्रम फिलहाल विधायक हैं। राजद ने दोबारा उनपर दांव लगाया है वहीं बीजेपी की तरफ से निक्की हेम्ब्रम प्रत्याशी हैं।
स्वीटी सीमा हेम्ब्रम के सामने इस सीट को बचाये रखने की चुनौती है वहीं निक्की हेम्ब्रम के ससुर सोनेलाल हेम्ब्रम इस सीट से विधायक रह चुके हैं। ऐसे में दोनो ही उम्मीदवार कोई कोर कसर नही छोड़ना चाहते हैं। इस सीट पर यूँ तो कुल 5 प्रत्याशी हैं लेकिन मुख्य मुकाबला इन्ही दो दलों के बीच है।
बाँका- इस सीट से नीतीश सरकार में मंत्री और बीजेपी से विधायक रामनारायण मंडल की प्रतिष्ठा दांव पर है। इस बार उनका मुकाबला राजद के जावेद इकबाल अंसारी से है। वह राजद में थे और आबाद में जदयू में शामिल होकर मंत्री भी रहे।
हालांकि कुछ दिनों पहले वह दोबारा राजद में लौटे और अब बाँका से रामनारायण मंडल के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं। इस सीट पर नीतीश सरकार में मंत्री रहे मंडल के सामने इन चुनावों में इस सीट को जीतने की चुनौती है। 2015 में यहां जीत हार का अंतर काफी कम वोटों का था।
अमरपुर- इस सीट पर जदयू के कब्जा था। जनार्दन मांझी यहां से विधायक बने थे। इस बार उनके पुत्र जयंत राज को पार्टी ने टिकट दिया है। वहीं महागठबंधन से यह सीट कांग्रेस के हिस्से आई है और जितेंद्र सिंह यहां से उम्मीदवार बनाये गए हैं।
खास बात यह है कि इस सीट पर लोजपा ने मृणाल शेखर को उतारा है। उनके मैदान में आने से लड़ाई दिलचस्प हो गई है। जयंत के सामने पिता की विरासत बचाने की चुनौती है।
बेलहर- बेलहर विधानसभा सीट से राजद से मौजूदा विधायक रामदेव यादव हैं। जदयू ने इस बार इस सीट से विधान पार्षद मनोज यादव को उम्मीदवार बनाया है वहीं एलजेपी से बेबी यादव उर्फ अर्चना कुमारी मैदान में हैं।
इस सीट से 2015 में गिरधारी यादव जदयू से जीते थे। बाद में उनके सांसद बनने के बाद जदयू की तरफ से उपचुनाव में उनके भाई लालधारी यादव को टिकट दिया गया। हालांकि वह सीट नही बचा सके।
रामदेव यादव इस सीट से तीन बार विधायक रहे हैं वहीं इसे जदयू की परंपरागत सीट माना जाता है। देखना है इस बार जनता किसके साख को बचाएगी और किसपे लगेगा बट्टा?
धोरैया- यह सीट भी पिछले ढाई दशकों से जदयू के पास है। इस सुरक्षित सीट से एक उपचुनाव समेत कुल तीन चुनाव जीत मनीष कुमार हैट्रिक लगा चुके हैं। वहीं इस बार उनके सामने राजद ने भूदेव चौधरी को प्रत्याशी बनाया है।
भूदेव ही वह पहले नेता थे जिन्होंने जदयू में रहते यह सीट पहली बार जीती थी। वह जमुई से जब सांसद बने तो यहां मनीष कुमार को टिकट मिला। तब से मनीष यहां से लगातार जीतते रहे।
इस चुनाव में भूदेव के सामने जहां जदयू के बिना अपने चेहरे के दम पर यह सीट निकालने की चुनौती है वहीं मनीष कुमार के सामने इसे बचाये रखने की चुनौती है।
