संसद के मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने अपनी संसदीय कमिटियों में बदलाव किया हैं, जिसके तहत दो समूह का गठन किया गया है। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस के बागी नेताओं के गुट से भी कई सांसदों को इसमें जगह दी हैं।
इसमें शामिल रहे शशि थरूर और मनीष तिवारी को कांग्रेस ने अपनी लोक सभा समिति का सदस्य बनाया हैं। सोनिया गांधी ने अधीर रंजन चौधरी को लोक सभा में कांग्रेस के नेता के तौर पर बरकरार रखा हैं, जबकि पार्टी के उप नेता असम से संबंध रखने वाले गौरव गोगोई ही रहेंगे।
इस फैसले के बाद पिछले कुछ समय से अधीर चौधरी को हटाएं जाने की खबरों पर विराम लग गया हैं। के सुरेश लोक सभा में पार्टी के चीफ व्हिप बने रहेंगे जबकि रवनीत सिंह बिट्टू और मणिकम टैगोर भी पार्टी व्हिप के तौर पर लोक सभा में कांग्रेस की सात सदस्यीय समिति में शामिल रहेंगे।
राज्य सभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ही पार्टी के नेता रहेंगे, इसके अलावा आनंद शर्मा को दोबारा पार्टी का उप नेता नियुक्त किया गया हैं। जयराम रमेश राज्य सभा में पार्टी के चीफ व्हिप होंगे जबकि अंबिका सोनी, पी चिदंबरम, दिग्विजय सिंह और केसी वेणुगोपाल कांग्रेस की राज्य सभा समिति में शामिल होंगे।
इन कमिटियों के एलान के बाद सोनिया गांधी ने कहा कि संसद सत्र के दौरान यह समितियां रोज बैठक करेंगी, सत्र के अलावा भी इन समूहों की बैठकें आयोजित की जा सकती हैं।
लोक सभा और राज्य सभा समितियों की संयुक्त बैठक बुलाने के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे को संयोजक चुना गया हैं। रविवार को सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद विपक्षी दलों ने अलग बैठक कर संसद में सरकार को घेरने की रणनीति बनाई।
विपक्ष की इस बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग(आईयूएमएल), आरएसपी, शिवसेना और आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं ने भाग लिया।
ज्ञात हो कि मानसून सत्र में कांग्रेस मोदी सरकार को घेरने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहती। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों और कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सरकार की लापरवाही कांग्रेस के एजेंडे में शामिल हैं।
इसके अलावा टीकाकरण की धीमी रफ्तार, हाल में फ्रांस सरकार द्वारा राफेल मामले की शुरू की गई जांच, महंगाई, किसान आंदोलन सहित कई मुद्दों पर विपक्ष और सरकार के बीच दो-दो हाथ होना तय माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के प्रस्तावित जनसंख्या नियंत्रण कानून, राष्ट्रीय सुरक्षा आदि मुद्दों पर भी विपक्ष सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है।
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