शाहीनबाग में सड़क पर प्रदर्शन के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस अनिरूद्ध बोस और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने इसका फैसला सुनते हुए अपने फैसले में कहा कि ऐसे प्रदर्शन स्वीकार्य नही हैं। ऐसे प्रदर्शनों पर अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए।
हालांकि कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि अधिकारियों को किस तरीके से कार्य करना है यह उनकी जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रशासन को रास्ता जाम कर प्रदर्शन रहे लोगों को हटाना चाहिए, कोर्ट के आदेश का इंतजार नही करना चाहिए। कोर्ट ने इससे पहले बातचीत के लिए नियुक्त किये गए मध्यस्थों और प्रदर्शनकारियों की वार्ता विफल रहने पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें इसका कोई दुख नही।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोगों के आवागमन के रास्ते पर अनिश्चितकालीन धरना स्वीकार्य नही है। इसपर कब्जा नही किया जा सकता है। निर्दिष्ट स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया जा सकता है लेकिन आवागमन को अनिश्चित काल तक बाधित नही किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि CAA को चुनौती अलग से इस अदालत के समक्ष लंबित है।
अपना फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने एक टिप्पणी में कहा कि संविधान विरोध करने का अधिकार देता है लेकिन इसे समान कर्तव्यों के साथ जोड़ा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विरोध के अधिकार को आवागमन के अधिकार के साथ संतुलित करना होगा।
