हाथरस में एक लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले ने खूब तूल पकड़ा। पुलिसिया कार्रवाई की वजह से इस मामले में विपक्ष और मीडिया दोनो ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया हालांकि अब जो बातें इससे जुड़ी हुई सामने आई हैं वह किसी और बड़े साजिश की ओर इशारा करती हैं। दलित लड़की और ठाकुर समुदाय के आरोपियों के बीच इस मामले के सहारे यूपी को दंगों में झोंकने की साजिश का खुलासा हुआ है।
इस बात का अंदाज़ा कहीं न कहीं यूपी की योगी सरकार और पुलिस को था यही वजह है कि लाख उकसावे और आरोपों के बाद शुरुआती कुछ दिनों तक मीडिया और नेताओं की गांव में एंट्री बैन रखी गई।
इस बीच खुफिया इनपुट्स और रातों रात बनी वेबसाइट्स ने सरकार और पुलिस के शक को यक़ीन में बदल दिया। अब इस मामले में जांच और कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
पुलिस ने इसी मामले की जांच के दौरान मंगलवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के चार कार्यकर्ताओं को मथुरा से गिरफ्तार किया है। ये चारों लोग हाथरस जा रहे थे। इनमें एक मल्लापुरम का रहने वाला है, जबकि बाकी मुजफ्फरनगर, बहराईच और रामपुर के रहने वाले हैं।
पुलिस ने इन चारों के पास से मोबाइल, लैपटॉप और संदिग्ध साहित्य बरामद किया है। फिलहाल गिरफ्तार किए गए चारों लोगों से पुलिस की पूछताछ जारी है।
इससे पहले सोमवार को ही सुरक्षा एजेंसियों ने दावा किया था कि यूपी में दंगे फैलाने के लिए कईं फर्जी वेबसाइट रातों रात बनाई गई है। जिस पर दंगे कराने के लिए 20 दिशा-निर्देश भी लिखे गए हैं।
राज्य सरकार को भेजी गई खुफिया रिपोर्ट की मानें तो यूपी को दंगों में झोंकने की साजिश अमेरिका में ”ब्लैक लाइव्स मैटर” दंगों की तर्ज पर ही थी। बहुसंख्यक समाज में फूट डालने के लिए मुस्लिम देशों और इस्लामिक कट्टरपंथी संगठनों से ”जस्टिस फॉर हाथरस” वेबसाइट के लिए पैसा आया। इसके लिए विदेशी फंडिग हो रही थी। एमनेस्टी इंटरनेशनल के भी लिंक की जांच जारी है।
