देश के सबसे लोकप्रिय सीएम हैं योगी आदित्यनाथ, जानें कौन है इस लिस्ट में सबसे नीचे

इस सर्वे से पहले अगस्त 2019 और जनवरी 2020 के सर्वे में भी योगी टॉप पर रहे थे। वहीं 2020 के जनवरी में हुए सर्वे में अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर थे।

सड़क से सोशल मीडिया तक मचा राजनीतिक बवाल, क्या अब लद रहा दलित राजनीति का वक़्त ?

इस राजनीति की धुरी में कोई एक दल फिलहाल नही है लेकिन इतना तय है कि अगर राजनीति में विरोध का नया स्वर बुलंद हुआ तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान वर्तमान में बीजेपी को होगा। इसके पीछे वजह खास है, वह वजह है कि विरोध बीजेपी का वोट बैंक माने जाने वाले स्वर्ण समाज की तरफ से है।

एकजुट विपक्ष के लिए ममता-सोनिया का मोदी के खिलाफ यह आखिरी दांव,पढ़ें

यह दांव है बिना पीएम उम्मीदवार या चेहरे के चुनाव लड़ना। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो हाल ही में दिल्ली पहुंची ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की मुलाकात के बाद यह सामने आया है कि विपक्ष चुनाव बिना किसी चेहरे पर लड़ेगा।

2019 का मुद्दा एनआरसी नही इनमें से कोई एक होगा, तैयार है बीजेपी का मास्टरपालन

जनभावना से जुड़े मुद्दों की बात करें तो राम मंदिर और कश्मीर में धारा 370 और 35-अ से संबंधित मामले कोर्ट में लंबित हैं।

क्या ममता के लिए समाज और देश से बड़ी है राजनीति, कहाँ तक जाएगा यह स्तर ?

ममता राजनीति के लिए किस स्तर तक जाएंगी? क्या उनके लिए केंद्र और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों तक कि कोई अहमियत नही है? बंगाल में साम्प्रदायिक हिंसा की भयावहता दुनिया देख चुकी है।

असम में एनआरसी पर बवाल के बीच अब इस समुदाय को देश से बाहर करने की तैयारी में सरकार, पढ़ें

केंद्र सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को देश से बाहर करने की तैयारी में है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की मानें तो रोहिंग्या मुसलमान कई जगह आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं।

अगर ऐसा ही रहा तो ममता खुद बीजेपी को सौंप देंगी बंगाल, गलत राजनीति की है यह शुरुआत

यह वह परंपरा है जहां सत्ता के लिए समाज के टुकड़े करने की एक साजिश की बू आ रही है। बीजेपी वहां शून्य से शिखर पर आने को आतुर है वहीं वाम के लाल किले को बंगाल में ध्वस्त कर सत्ता में काबिज हुईं ममता को अपने ऊपर कुछ ज्यादा ही यकीन हो चला है।

राजनेताओं से यह सवाल पूछने की जहमत कौन उठाये, पूछ भी लें तो कौन सा भला हो जाये?

दिलचस्प यह भी है कि आज इसपर सवाल भी नही उठाये जा रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि न इससे टीआरपी मिलेगी, न इसमे कोई मसाला है, न किसी की दिलचस्पी है।

चुनावी चक्रव्यूह तीनों तरफ से है लेकिन फंसेगा कौन?

राजनीति के महारथी अभी से अपने अपने दायरे बनाने में और दूसरों के लिए चक्रव्यूह की रचना करने में लगे हैं। हर तरफ से अपने मुताबिक एक परिधि बनाई जा रही है ताकि खुद को सुरक्षित रख कर दूसरों का मुकाबला किया जा सके। यह परिधि कुछ और नही मुद्दे हैं।

ममता को हाई कोर्ट कि फटकार कहा न करें दरार पैदा करने कि राजनीति

यह सारा विवाद तब उत्पन्न हुआ जब ममता सरकार ने मुहर्रम को तवज्जो देते हुए विजयादशमी के बाद सिर्फ 6 बजे तक मूर्ति विसर्जन कि अनुमति दी थी.