नीतीश के मंत्री को तेजस्वी का सहारा, जदयू से निकाले गए तो आरजेडी में हुए शामिल

जदयू के बड़े दलित नेता श्याम रजक पार्टी से निष्काषित किए जाने के बाद अब आरजेडी में शामिल हो गए हैं।

चुनाव से पहले जदयू में बड़ा पॉलिटिकल ड्रामा, मंत्री के पार्टी छोड़ने की अटकलों के बीच पार्टी ने किया निष्काषित

श्याम रजक आरजेडी में घर वापसी करेंगे। 2009 में उन्होंने आरजेडी छोड़ जदयू के दामन थाम लिया था।

बिहार में टूट की तरफ बढ़ रहा एनडीए, तेजस्वी बोले- मेरा बोलना अभी ठीक नही

चिराग आसवन से पूछा गया कि आज इस अचानक बुलाई गई मीटिंग का एजेंडा क्या है तो उन्होंने कहा बिहार में बाढ़ और कोरोना महामारी जैसे बहुत मुद्दे हैं

क्या एनडीए में नही है एकमत? यह बड़ा नेता है नीतीश के खिलाफ

पहले सीएम के चुनाव कराने के फैसले और अब खुद सीएम की खिलाफत कर रामविलास ने मोर्चा खोल यह स्पष्ट कर दिया है कि एनडीए में सब वेल एंड गुड नही है।

मुश्किल है नीतीश, तेजस्वी की डगर, पुष्पम प्रिया चौधरी बनेंगी बड़ा रोड़ा

वह जिले वॉर दौरे और वहां रोजगार की संभावना, कृषि क्षेत्र के विकास के लिए संभावना, इंडस्ट्री डेवलपमेंट की संभावना शेयर कर रही हैं।

बिहार में कोरोना के बाद बाढ़ से हाहाकार, लाखों प्रभावित, सीएम ने लिया जायज़ा

बाढ़ से बिहार के 38 में से 16 जिले बुरी तरह प्रभावित हैं। लाखों की आबादी अपना सब कुछ गंवा कर जान बचाने की जद्दोजहद कर रही है।

राजनीति में कब तक दोहराए जाएंगे पुराने राग, मुद्दे क्यों हैं गौण ?

राजनीति में बदलाव लाने के नाम पर आई आम आदमी पार्टी भी उसी दलगत,जातिगत राजनीति का हिस्सा बन गई है। भ्रष्टाचार और लंबे चौड़े वादे कर कांग्रेस को बेदखल करने वाली बीजेपी भी उसी राह चल चुकी है। कांग्रेस के पास न चेहरा है न देश के पास विकल्प जो इसकी भरपाई कर सके।

सड़क से सोशल मीडिया तक मचा राजनीतिक बवाल, क्या अब लद रहा दलित राजनीति का वक़्त ?

इस राजनीति की धुरी में कोई एक दल फिलहाल नही है लेकिन इतना तय है कि अगर राजनीति में विरोध का नया स्वर बुलंद हुआ तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान वर्तमान में बीजेपी को होगा। इसके पीछे वजह खास है, वह वजह है कि विरोध बीजेपी का वोट बैंक माने जाने वाले स्वर्ण समाज की तरफ से है।

एकजुट विपक्ष के लिए ममता-सोनिया का मोदी के खिलाफ यह आखिरी दांव,पढ़ें

यह दांव है बिना पीएम उम्मीदवार या चेहरे के चुनाव लड़ना। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो हाल ही में दिल्ली पहुंची ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की मुलाकात के बाद यह सामने आया है कि विपक्ष चुनाव बिना किसी चेहरे पर लड़ेगा।

बिहार में कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे से तबाह हैं किसान

बिहार में हर साल बाढ़ और सूखा का प्रभाव बराबर रूप से होता है। मुआवजा का खेल भी चलता है लेकिन किसानों तक जब चेक पहुंचता है तो रकम हास्यास्पद होती है। उत्तरी बिहार में बाढ़ जहां हर साल तबाही की एक नई इबारत लिख फसल को तहस नहस कर जाती है वहीं दक्षिणी बिहार में सूखे से किसान बर्बाद होते हैं।

अर्जित को गिरफ्तार न करने के पीछे यह वजह है, पढ़ें विस्तार से

चंद लोगों की गलती या कहें हुड़दंग का खामियाजा आज पूरा बिहार भुगतने को मजबूर है। भागलपुर में एक जुलूश के बाद हुए हंगामे के बाद अब यह मुंगेर, नालंदा, समस्तीपुर तक पहुंच चुका है। इसमे अब राजनीति भी खूब हो रही है या यूं कहें राजनीति की वजह से ही यह सब हो रहा है।

इस नेता की छवि ही बनी ऐसी, बदनाम हुए तो क्या हुआ नाम तो हुआ

आज उम्र के इस पड़ाव में जेल में जीवन बिताने को बाध्य कर दिया। इसके बावजूद न लालू झुके, न बदला उनका तेवर और अंदाज़। इसलिए तो कहते हैं कि लालू बदनाम तो हुए लेकिन नाम भी खूब हुआ।

राजनेताओं से यह सवाल पूछने की जहमत कौन उठाये, पूछ भी लें तो कौन सा भला हो जाये?

दिलचस्प यह भी है कि आज इसपर सवाल भी नही उठाये जा रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि न इससे टीआरपी मिलेगी, न इसमे कोई मसाला है, न किसी की दिलचस्पी है।

शराबबंदी के दो साल लेकिन इन दो सवालों का नही है कोई जवाब

यह फैसला उचित और समाज हित मे है लेकिन इस फैसले के बाद जो शराबी जेल में बंद है( संख्या एक लाख से ज्यादा है) उनके परिवार की खुशी का क्या?

विशेष- नीतीश की चुप्पी आत्मविश्वास या मजबूरी, क्या फिर बनेगी बीजेपी से दूरी?

नीतीश को अपने शासन और प्रशासन पर पूरा भरोसा है, ऐसा लगता है। यही वजह है कि वह इतने तनाव के बीच भी सिर्फ नजरें गड़ाए, दबाव झेलते हुए हुए चुपचाप स्थित्ति के आकलन और राजनीतिक नफा नुकसान में लगे हैं।

पुलिस का इससे विभत्स चेहरा शायद ही नजर आए, यह अपने विभाग के नही तो आपके क्या होंगे?

सिपाही को उसी के साथियों ने एक डीएसपी रैंक के अधिकारी के कहने पर इतना पीटा की वह मर गया। और तो और इस मामले को दबाने की भरपूर कोशिश हुई लेकिन अब मामले ने न सिर्फ तूल पकड़ लिया है बल्कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह तक से इंसाफ की गुहार लगाई जा रही है।

राहुल के सामने बतौर अध्यक्ष हैं यह बड़ी चुनौतियां, इनसे पार पा गए तो मोदी पर पड़ेंगे भारी

राहुल के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस की छवि के साथ अपनी छवि को सुधारना है। कार्यशैली में बदलाव लाना है क्योंकि कांग्रेस आज भी नेहरू इंदिरा वाली कांग्रेस है इसमें कुछ भी नयापन नजर नही आता।