क्या यूपी की राजनीति में आएगा नया मोड़, इस बड़े नेता पर डोरे डाल रही बीजेपी

केशव ने शिवपाल सिंह यादव को ऑफर देने के लहजे में बोलते हुए कहा कि शिवपाल चाहें तो बीजेपी में अपने दल का विलय कर लें।

एक ऐसा इंटरव्यू जिसने राजनीतिक गलियारों में मचाया तूफान, गठबंधन पस्त, बीजेपी मस्त

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस-बसपा गठबंधन की किसी भी संभावना से इनकार कर दिया है वहीं बीजेपी को अप्रत्यक्ष तौर पर फौरी राहत भी दे दी है।

क्या यूपी की राजनीति में आएगा नया मोड़, इस बड़े नेता पर डोरे डाल रही बीजेपी

केशव ने शिवपाल सिंह यादव को ऑफर देने के लहजे में बोलते हुए कहा कि शिवपाल चाहें तो बीजेपी में अपने दल का विलय कर लें। वह गठबंधन के बाबत बोल रहे थे।

राजनीति में कब तक दोहराए जाएंगे पुराने राग, मुद्दे क्यों हैं गौण ?

राजनीति में बदलाव लाने के नाम पर आई आम आदमी पार्टी भी उसी दलगत,जातिगत राजनीति का हिस्सा बन गई है। भ्रष्टाचार और लंबे चौड़े वादे कर कांग्रेस को बेदखल करने वाली बीजेपी भी उसी राह चल चुकी है। कांग्रेस के पास न चेहरा है न देश के पास विकल्प जो इसकी भरपाई कर सके।

सड़क से सोशल मीडिया तक मचा राजनीतिक बवाल, क्या अब लद रहा दलित राजनीति का वक़्त ?

इस राजनीति की धुरी में कोई एक दल फिलहाल नही है लेकिन इतना तय है कि अगर राजनीति में विरोध का नया स्वर बुलंद हुआ तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान वर्तमान में बीजेपी को होगा। इसके पीछे वजह खास है, वह वजह है कि विरोध बीजेपी का वोट बैंक माने जाने वाले स्वर्ण समाज की तरफ से है।

क्यों सोया है पुलिस प्रशासन, क्या किसी बड़ी घटना का है इंतजार?

आज भी आम जनता थानों के चक्कर लगा रही है और पुलिस प्रशासन न जाने कौन सी कुम्भकर्णी नींद सो रहा है। माहौल ऐसा है कि न सरकार के आदेशों का पालन हो रहा है न उचित कार्रवाई।

एकजुट विपक्ष के लिए ममता-सोनिया का मोदी के खिलाफ यह आखिरी दांव,पढ़ें

यह दांव है बिना पीएम उम्मीदवार या चेहरे के चुनाव लड़ना। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो हाल ही में दिल्ली पहुंची ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की मुलाकात के बाद यह सामने आया है कि विपक्ष चुनाव बिना किसी चेहरे पर लड़ेगा।

राजनेताओं से यह सवाल पूछने की जहमत कौन उठाये, पूछ भी लें तो कौन सा भला हो जाये?

दिलचस्प यह भी है कि आज इसपर सवाल भी नही उठाये जा रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि न इससे टीआरपी मिलेगी, न इसमे कोई मसाला है, न किसी की दिलचस्पी है।

यूपी में अपने ही बनाए जाल में फंसी बीजेपी

कांग्रेस ने सपा-बसपा पर दबाव बनाने के मकसद से दोनों सीटों पर सपा प्रमुख अखिलेश के मना करने के बावजूद प्रत्याशी खड़े किए। इसके पीछे मकसद यह था कि या तो सपा झुके और एक एक सीट पर बात बने

विरोधियों को छोड़िये अब सहयोगी भी नही दे रहे बीजेपी-कांग्रेस को भाव

कांग्रेस को कोई भी क्षेत्रीय दल तवज्जो देता नही दिख रहा और बीजेपी किसी अन्य दल को अपने सामने तवज्जो दे उनका ग्राफ बढ़ाना नही चाहती है। यही वजह है कि हर जायज-नाजायज मांग मानने के बदले बीजेपी ने डिफेंड करना ही सही समझा है।

प्रशांत किशोर की मोदी से मुलाकात, क्या फिर संभालेंगे प्रचार की कमान?

प्रशांत किशोर ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने बीजेपी के प्रचार की कमान संभाल रखी थी और ब्रांड मोदी की सुनामी पूरे देश मे खड़ी कर दी थी। अब प्रशांत किशोर एक बार फिर चर्चा में हैं। चर्चा में होने की वजह कुछ दिनों पहले पीएम से हुई उनकी मुलाकात है।

क्या एक बार फिर यूपी में हारेगी बीजेपी?

असली पेंच फंसेगा 9 वीं सीट पर। यहां बीजेपी को समर्थन की जरूरत होगी और ऐसे में राज्य सरकार पर हमलावर मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर बड़ा रोल निभाएंगे।

मोदी, राहुल की राह मुश्किल करेंगे अखिलेश-माया

सपा-बसपा के एक होने से मिली हार ने बीजेपी को तगड़ा झटका माना जा रहा है। कांग्रेस गठबंधन में होते हुए भी पूरे परिदृश्य से गायब रही और जमानत तक जब्त करा बैठी।

आज शाह-योगी पर उठ रहे सवाल लेकिन आगे वापसी होगी जोरदार, पढ़ें कैसे

जिस तरह बहुत ही साफगोई से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस हार को स्वीकार किया वह वाकई काबिले तारीफ है। इसके अलावा यहां यह भी गौर करने वाली बात है कि योगी और शाह दोनो ही नेताओं ने कहा की दो हारे हैं, सारी जीतेंगे।

30 साल में 7 वीं बार हो रही विपक्षी एकता की बात, इस बार आवाज़ दक्षिण से आई है

इस बार यह मुद्दा उठाया है दक्षिण के तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने और तो और कुछ दलों ने उनके बयान के बाद आश्वासन और स्वीकृति तक दे दी है।

क्या तय समय से पहले हो सकते हैं लोकसभा चुनाव, जानें क्या है सच

खबरों के मुताबिक अप्रैल में एलान हो सकते हैं। जी नही ऐसा अब इस माहौल में नही होगा जब कि बीजेपी अपने सहयोगियों और विपक्ष से घिरी हुई है। पहले ऐसा एलान इसलिए संभव था क्योंकि मोदी लहर फीकी पड़ने से पहले मोदी और बीजेपी यह मौका भुना लेना चाहते थे।