पाकिस्तान रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने ऐलान किया है कि नई पाक-सऊदी रक्षा संधि के तहत अगर भारत युद्ध छेड़ता है तो सऊदी अरब पाकिस्तान का साथ देगा। उन्होंने इस समझौते को नाटो के आर्टिकल 5 जैसा बताते हुए कहा कि “किसी भी पक्ष पर आक्रामकता दोनों पर आक्रमण मानी जाएगी।”
आसिफ ने दावा किया कि यह समझौता डिफेंसिव (रक्षात्मक), न कि ऑफेंसिव (आक्रामक) है। साथ ही उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान की परमाणु क्षमताएं भी सऊदी के लिए उपलब्ध होंगी, यदि ज़रूरत पड़ी।
एक वरिष्ठ सऊदी अधिकारी ने भी रॉयटर्स से कहा कि यह “कंप्रीहेंसिव डिफेंसिव एग्रीमेंट” है, जिसमें सभी सैन्य साधन शामिल हैं।
समझौते पर पाक पीएम शहबाज़ शरीफ़ की रियाद यात्रा के दौरान दस्तख़त हुए। विश्लेषकों के मुताबिक, यह सौदा इस्लामाबाद की परमाणु क्षमता और रियाद की वित्तीय ताक़त को जोड़ता है। इसके चलते ईरान और इज़रायल जैसे देश भी इस डील पर कड़ी नज़र रख रहे हैं।
भारत सरकार ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह डील “दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था का औपचारिक रूप” है, और इसके प्रभावों पर विचार किया जा रहा है।
