बुधवार को लोकसभा में भारी हंगामे और विपक्षी विरोध के बीच मर्चेंट शिपिंग (संशोधन) विधेयक 2024 को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। यह विधेयक 1958 के मर्चेंट शिपिंग अधिनियम को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
केंद्रीय पोत परिवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बिल को सदन में पेश किया। नए संशोधन के तहत अब “जहाजों” की परिभाषा में मोबाइल ऑफशोर ड्रिलिंग यूनिट्स, सबमर्सिबल्स और नॉन-डिसप्लेसमेंट क्राफ्ट्स को भी शामिल किया गया है। साथ ही, जहाजों के रीसाइक्लिंग के लिए अस्थायी पंजीकरण की व्यवस्था भी जोड़ी गई है, जिससे अलंग जैसे शिप रीसाइक्लिंग हब्स को बढ़ावा मिलेगा।
इस दौरान विपक्षी सांसद बिहार में मतदाता सूची की विशेष पुनरीक्षण (SIR) पर चर्चा की मांग को लेकर नारेबाजी करते रहे, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित रही। इसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने स्पष्ट किया कि ऐसे मुद्दे, जो न्यायालय में विचाराधीन हैं, उन पर संसद में चर्चा नहीं की जा सकती।
बिल के जरिए समुद्री शिक्षा व प्रशिक्षण को नियंत्रित करने की शक्ति डायरेक्टर जनरल ऑफ मरीन एडमिनिस्ट्रेशन को दी गई है, जिससे भारतीय नाविकों को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार किया जा सकेगा।
बिल पारित होने के बाद, सदन की कार्यवाही गुरुवार तक स्थगित कर दी गई।
