भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक स्वास्थ्य कारणों से अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में लिखा, “सेहत को प्राथमिकता देते हुए और डॉक्टरी सलाह के अनुसार मैं संविधान के अनुच्छेद 67(a) के तहत तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूं।”
74 वर्षीय धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था। वे संसद सत्र के दौरान इस्तीफा देने वाले देश के पहले उपराष्ट्रपति बन गए हैं। धनखड़ ने 2022 में उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली थी, जहां उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया था। उन्हें 528 वोट मिले थे, जबकि अल्वा को 182।
उनके इस्तीफे पर कई नेताओं ने प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “यह फैसला जितना चौंकाने वाला है, उतना ही असाधारण।” कपिल सिब्बल ने कहा, “मैं व्यक्तिगत रूप से दुखी हूं। विचारधारा अलग होने के बावजूद हमारे संबंध सौहार्दपूर्ण थे।”
धनखड़ की तबीयत पिछले कुछ महीनों से खराब चल रही थी। 25 जून को उत्तराखंड में कार्यक्रम के दौरान उन्हें सीने में दर्द हुआ था। मार्च 2025 में भी उन्हें AIIMS दिल्ली में भर्ती कराया गया था।
धनखड़ ने अपने त्याग पत्र में भारत की प्रगति, लोकतंत्र और प्रधानमंत्री के सहयोग की सराहना करते हुए देश को शुभकामनाएं दीं।
यह इस्तीफा केवल संवैधानिक औपचारिकता नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं की शुरुआत है।
