सुशील मोदी ने कांग्रेस-राजद के ‘युवराज’ से फिर पूछे पांच सवाल, जानें

सुशील मोदी ने ट्वीट के माध्यम से एक के बाद एक कई सवाल पूछे हैं। पिछले तीन दिनों में वह 16 सवाल तेजस्वी यादव और कांग्रेस से कर चुके हैं। इसी क्रम में आज एक बार फिर एक के बाद एक कई ट्वीट करते हुए सुशील मोदी ने राजद और कांग्रेस के युवराज से कुछ सवालों के जवाब मांगे हैं।

बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर राज्य में सियासी घमासान जारी है। प्रचार के श्री के बीच आरोप-प्रत्यारोप के शब्दबाण जमकर चलाये जा रहे हैं। एनडीए और महागठबंधन के बीच की इस लड़ाई में बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी लगातार राजद और कांग्रेस नेताओं पर निशाना साध रहे हैं।

सुशील मोदी ने ट्वीट के माध्यम से एक के बाद एक कई सवाल पूछे हैं। पिछले तीन दिनों में वह 16 सवाल तेजस्वी यादव और कांग्रेस से कर चुके हैं। इसी क्रम में आज एक बार फिर एक के बाद एक कई ट्वीट करते हुए सुशील मोदी ने राजद और कांग्रेस के युवराज से कुछ सवालों के जवाब मांगे हैं।

सुशील मोदी ने अपने पहले ट्वीट में सवाल करते हुए पूछा,’एनडीए सरकार के 15 साल में बेतिया, पावापुरी, मधेपुरा सहित पांच नये मेडिकल कालेज खुले। दरभंगा एम्स सहित 11 मेडिकल कालेज स्थापित किये जा रहे हैं। कांग्रेस-राजद के युवराज बतायें कि बिहार में 55 साल में केवल 1 नया मेडिकल कालेज क्यों खुला?’

अपने दूसरे सवाल में मोदी ने पूछा,’एनडीए सरकार ने 39 इंजीनियरिंग कालेज खोले।  वे केवल 2 इंजीनियरिंग कालेज क्यों खोल पाये? जो बिहार में इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई का इंतजाम नहीं कर पाये, वे क्या प्रतिभा पलायन के लिए जिम्मेदार नहीं हैं?’

तीसरा सवाल दागते हुए सुशील मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा,’हमारी सरकार ने कौशल विकास के लिए हर जिले में पॉलीटेक्निक ( कुल 31) खोलवाये। उनके राज में केवल 13 पॉलिटेक्निक क्यों खुले?’

अपने अगले सवाल में मोदी ने पूछा कि क्या आप 10 लाख अकुशल लोगों को नौकरी दे सकते हैं? मोदी ने लिखा,’एनडीए सरकार 149 आइटीआइ स्थापित कर रही है, ताकि युवा नौकरी और रोजगार के लायक बनें। बड़बोले दावे करने वाले केवल 29 आइटीआइ क्यों खोल पाए?क्या वे दस लाख अकुशल लोगों को भी सरकारी नौकरी दे सकते हैं?’

आखिरी सवाल करते हुए सुशील मोदी ने कहा,’एनडीए सरकार निजी क्षेत्र में 1202 आइटीआइ स्थापित करा रही है। महागठबंधन के युवराज बतायें कि आजादी के 60 साल बाद भी निजी क्षेत्र में केवल गिने-चुने आइटीआइ क्यों हैं?’

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