कोरोना वायरस के भारत मे आने के बाद सबसे ज्यादा चिंता बिहार, यूपी जैसे बड़ी आबादी वाले राज्यों को लेकर थी। यहां स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था को लेकर थी। इसी बीच बिहार से बदहाली की तस्वीरें आनी शुरू हो गईं। अस्पताल में मरीज मरते देखे गए। इसके बाद एक्शन में आई नीतीश सरकार ने स्वास्थ्य सचिव को बदल डाला।

राज्य में टेस्टिंग में तेजी लाई गई। अस्पतालों में व्यवस्था बढ़ाई गई और आज बिहार सबसे ज्यादा कोरोना टेस्ट करने के मामले में दूसरे नंबर पर है। इस मामले में यूपी सबसे आगे है। खैर यह तो बात हुई कुछ महीने पहले की। इन सब के बीच राज्य में चुनाव कराए जाने चाहिए या नही इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई।

सरकार तय समय पर चुनाव करा लेना चाहती थी। विपक्ष तब तैयार नही था। मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया लेकिन कोर्ट ने भी अनुमति दे दी। अब आयोग के सामने चुनौती थी कोरोना काल मे भीड़ इक्कठा होने से रोकना। मास्क और शारीरिक दूरी का पालन कराना। इसके लिए गाइडलाइन भी आयोग की तरफ से जारी कर दी गई।

हालांकि समय बीतने के साथ कोरोना प्रोटोकाल की धज्जियां उड़ गई। रैलियों में भीड़ उमड़ पड़ी। मास्क और शारीरिक दूरी का पालन बीती बात हो गई। जैसे कोरोना जैसी कोई महामारी बिहार में है ही नही। खास बात यह है कि इतनी भीड़ और हर प्रोटोकाल की धज्जियां उड़ने के बाद बिहार में संक्रमित होने वालों और मरने वालों का आंकड़ा तेजी से नीचे गया।

बिहार सरकार की तरफ से साझा की गई जानकारी के मुताबिक अभी तक बिहार में दो लाख 15 हजार लोग संक्रमित हुए हैं। इनमे से 1000 से कुछ ज्यादा लोगों की मौत हुई है जबकि बाकी लोग स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। बिहार में हर दिन एक लाख से ज्यादा टेस्ट किये जा रहे और नए संक्रमित मरीजों के मामले में भी कमी देखी जा रही है। ऐसे में बाकी देशों और राज्यों के लिए आफत बना कोरोना फिलहाल बिहार से गायब नजर आ रहा है और यह विशेषज्ञोंनके लिए एक पहेली है।

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