बिहार के मुंगेर में दुर्गापूजा विसर्जन के दौरान हुई हिंसा और कथित पुलिसिया कार्रवाई में एक व्यक्ति की मौत के बाद दो दिन शहर में अजीब खामोशी थी। यह खामोशी तूफान से पहले के सन्नाटे जैसे साबित हुई और चुनाव खत्म होने के अगले दिन आज मुंगेर धधक उठा। आरोपियों पर कार्रवाई न होता देख आमलोगों के गुस्सा भड़क उठा और देखते ही देखते शहर जल उठा।

मुंगेर में हुई आगजनी के बाद जिले के एसपी और डीएम को निर्वाचन आयोग ने हटा दिया है। हालांकि इसमें इतनी देर क्यों कि गई यह सवाल अब भी सब के जहन में है? उसी दिन कार्रवाई की जाती तो शायद मुंगेर आज हिंसा की आग में न जला होता।

अब मुंगेर हिंसा पर राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस की तरफ से इस बाबत के बयान में कहा गया,’नीतीश राज ने बिहार को अराजकता की आग में झोंक दिया, नीतीश और सुशील मोदी सरकार को एक क्षण भी गद्दी पर बने रहने का ​अधिकार नहीं है। 72 घंटों में दूसरी बार मुंगेर हिंसा की लपटों में घिर गया है, बिहार की कानून-व्यवस्था तार-तार है।’

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