अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में आतंक फैलाने वालों के खिलाफ कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जो लोग आतंकवाद के कृत्य करते हैं, वे संयुक्त राज्य अमेरिका को अपना बड़ा दुश्मन पाएंगे।
ऐसे लोगों को सबक सिखाने में अमेरिका जरा भी संकोच नहीं करेगा। बाइडेन ने कहा कि अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ अपनी और अपने सहयोगियों की रक्षा करना जारी रखेगा। अपने संबोधन में उन्होंने चीन पर भी निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका चीन के साथ संबंधों के संदर्भ में नया शीत युद्ध नहीं चाहता है। अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने भारत का जिक्र करते हुए कहा कि हमने स्वास्थ्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, उभरती प्रौद्योगिकियों की चुनौतियों का सामना करने के लिए क्वाड साझेदारी को बढ़ाया है।
राष्ट्रपति ने अफगानिस्तान में युद्ध की समाप्ति के मुद्दे पर कहा कि, अमेरिका अथक कूटनीति के एक नए युग की शुरुआत कर रहा है। बाइडेन ने यह भी कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका “यदि आवश्यक हो” तो बल का उपयोग करने के लिए तैयार होगा, लेकिन साथ ही सैन्य शक्ति को “अंतिम उपाय का उपकरण” होना भी बताया।
“हम आज आतंकवाद के खतरे का सामना कर रहे हैं, हमने अफगानिस्तान में 20 साल के संघर्ष को समाप्त कर दिया है। जैसे ही हमने इस युद्ध को बंद किया है वैसे ही कूटनीति के नए दरवाजे खुल रहे हैं।” बाइडेन ने दावा किया।
उन्होंने कोरोना वायरस, आतंकवाद, अफगानिस्तान, ईरान पर भी अपने रुख को स्पष्ट किया। यूएनजीए के 76वीं सभा को संबोधित करते हुए कोरोना वायरस से मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए बाइडेन ने कोरोना को बड़ी पीड़ा और असाधारण संभावनाओं का समय बताया।
उन्होंने कहा “इस समय हमारी सुरक्षा, समृद्धि, स्वतंत्रता आपस में जुड़ी हुई है। हमें पहले की तरह एक साथ काम करना चाहिए। मिशन स्पष्ट और प्राप्त करने योग्य होना चाहिए, अमेरिकी लोगों की सूचित सहमति के साथ और जब भी संभव हो हमारे सहयोगियों के साथ साझेदारी में किया जाना चाहिए।”
उन्होंने आशा जताई कि कलेक्टिव साइंस और राजनीतिक इच्छाशक्ति कोरोना महामारी को साधने में सहायक होगी।
राष्ट्रपति ने ईरान और उत्तर कोरिया को लेकर भी दुनिया के सबसे बड़े मंच से सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। हम कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्ण विसैन्यीकरण को आगे बढ़ाने के लिए गंभीर और निरंतर कूटनीति चाहते हैं।”
राष्ट्रपति जो बाइडेन का संयुक्त राष्ट्र महासभा से यह पहला संबोधन था।
