भारत ने काबुल में फिर खोला दूतावास, तालिबान संग रिश्तों की नई परिभाषा

अफगानिस्तान में चार साल बाद भारत ने अपने राजनयिक रिश्ते पूरी तरह बहाल कर दिए हैं। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शुक्रवार को काबुल में अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी की मौजूदगी में घोषणा की कि भारत अपने टेक्निकल मिशन को अब पूर्ण दूतावास का दर्जा देगा।

जयशंकर ने कहा, “भारत अफगानिस्तान की संप्रभुता, एकता और स्वतंत्रता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमें अफगानिस्तान के विकास और प्रगति में गहरी रुचि है।” उन्होंने यह भी बताया कि भारत वहां छह नए विकास परियोजनाएं शुरू करेगा।

भारत ने अफगान जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए 20 एंबुलेंस और अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण, वैक्सीन और कैंसर की दवाइयां उपहार में देने की घोषणा की है।

काबुल स्थित भारतीय दूतावास को चार वर्ष पहले तालिबान और तत्कालीन अफगान सरकार के बीच संघर्ष के चलते सीमित कर दिया गया था। उस समय भारतीय वायुसेना के दो C-17 विमान तैनात कर कूटनीतिक कर्मचारियों को सुरक्षित स्वदेश लाया गया था।

मुत्ताकी की यह यात्रा तालिबान शासन के बाद भारत और अफगानिस्तान के बीच पहला बड़ा राजनयिक संवाद है। संयुक्त राष्ट्र ने इस यात्रा के लिए विशेष छूट दी, जो इसकी अहमियत को दर्शाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की रणनीतिक और सुरक्षा दृष्टि से अहम पहल है, जिससे न केवल क्षेत्र में शांति के नए रास्ते खुल सकते हैं, बल्कि चीन और पाकिस्तान के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में भी मदद मिलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *