बिहार में इन दिनों चुनावी शोर चरम पर है। आरोप-प्रत्यारोप का एक लंबा दौर पिछले काफी दिनों से बिहार में नेताओं के बीच देखने को मिल रहा है। अभी तक सर्वे और ग्राउंड रिपोर्ट की बात करें तो एनडीए, महागठबंधन से कहीं आगे है।
अभी तक के सर्वे यह बता रहे कि राज्य में एनडीए की सरकार वापसी करेगी। हालांकि यह जरूर है कि सीएम नीतीश की फेस वैल्यू और जदयू की सीटों के कम होने का अंदाज़ा भी लगातार लगाया जा रहा है।
इन सब के बीच इन चुनावों में सीएम नीतीश की एक ऐसी छवि या बदला अंदाज़ देखने को मिला जो अमूमन पिछले 15 सालों में शायद ही अब तक किसी ने देखा था। इन चुनावों में सीएम नीतीश या तो ज्यादा आक्रामक होकर विपक्ष पर हमला कर रहे हैं या लगातार उभरते विरोध के स्वर से वह आपा खोते नजर आ रहे हैं। पहले परसा सीट पर चंद्रिका राय के प्रचार के दौरान मंच से उनका गुस्सा देखने को मिला।
इसके बाद शनिवार को वह बेगूसराय की तेघड़ा विधानसभा सीट पर प्रचार के लिए पहुंचे थे। यहां सीएम द्वारा कही गई बात और भाषा की मर्यादा को लेकर अब सवाल उठाए जा रहे हैं।
सीएम नीतीश ने यहां सम्बोधन के दौरान कहा,’ जब लोगों को मौका मिला तो क्या एक स्कूल भी बनवाया? अगर पढ़ना चाहते हो तो जाकर अपने बाप और माता से पूछो कि क्या हालत थी? कहीं कोई स्कूल या कॉलेज बना?
अब सीएम की इस भाषा पर सवाल उठाए जा रहे साथ ही लगातार सीएम नीतीश को आपा खोते देख यह समझना थोड़ा मुश्किल है कि सीएम के रुख में अचानक यह बदलाव क्यों आया है। विपक्ष ने सीएम के इस रुख पर अब कहना शुरू कर दिया कि यह आने वाली हार को देखते हुए झल्लाहट है। वहीं जदयू नेता इसे आक्रामक स्ट्रेटेजी का हिस्सा मानते हैं।
