बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर इस बार भी अहम मुद्दे गायब ही नजर आ रहे हैं। प्रचार इस बार भी मुद्दों से ज्यादा निजी और व्यक्तिगत हमले पर केंद्रित है। तेजस्वी बेशक बेरोजगारी, बाढ़ और कोरोना जैसे मुद्दे उठा रहे लेकिन सत्ता पक्ष की तरफ से सब ठीक बताते हुए बस डिफेंड करने की रणनीति अपनाई जा रही है।
बिहार पिछले 15 वर्षों में बेशक आगे बढ़ा है लेकिन बेरोजगारी, उद्योग और शिक्षा स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में हम बहुत आगे नही बढ़े यह कहना गलत नही होगा।
इसी बीच बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी का अहम बयान सामने आया है। तेजस्वी-तेजप्रताप के हलफनामे और लालू परिवार की संपत्ति को पिछले दिनों घेरने वाले सुशील मोदी ने कहा,’इस चुनाव में बिजली सबसे बड़ा मुद्दा है, कोई सपने में नहीं सोचता था कि बिहार के हर घर तक बिजली पहुंच जाएगी लेकिन NDA की सरकार ने वो काम कर दिया जो असंभव सा दिखता था।
हमने तय किया है कि बिजली को खेत तक पहुंचाएंगे, अब बिहार का किसान बिजली से सिंचाई करेगा।’
इसके अलावा उन्होंने आगे कहा,’कृषि के लिए बिजली का खर्च 6.50 रुपये आता है लेकिन हम किसानों से केवल 65 पैसे प्रति यूनिट लेंगे। हम खेतों में सोलर पंप लगाएंगे ताकि हमारे अन्नदाता ऊर्जादाता बन सकें।
सोलर पंप से बनी बिजली का वो इस्तेमाल करेंगे और बची हुई बिजली ग्रिड पर बेच सकेंगे।’ अब देखना है जनता के लिए आज बिजली अहम है या रोजगार,बाढ़, स्वास्थ्य का मुद्दा अहम है।
