राजद नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने विपक्ष को साथ लाने की बातों को लेकर कहा कि कांग्रेस बिना कोई भी विपक्षी मोर्चा नहीं बन सकता है।
टीएमसी, एसपी और एनसीपी को अंहकार छोड़कर साथ आना चाहिए। ममता बनर्जी और चिराग को साथ लिए बगैर भाजपा को हराना उन्होंने मुश्किल बताया। 2024 में विपक्षी मोर्चे पर जब तेजस्वी से पूछा गया तो एजेंडे में कांग्रेस को सबसे ऊपर रखते हुए उन्होंने कहा “लोगों को एक विकल्प चाहिए, कांग्रेस एक अखिल भारतीय पार्टी है। कांग्रेस के बिना विपक्ष एक साथ नहीं आ सकता।”
तेजस्वी ने कहा कि “अब काफी देर हो चुकी है और हमें इस बात की रणनीति बनानी शुरू कर देनी चाहिए कि हम लोगों तक कैसे पहुंचेंगे। मुद्दों की कोई कमी नहीं है, लोगों को परेशानी हो रही है और वे चाहते हैं कि यह सरकार गिरे। लोग स्वीकार कर रहे हैं कि उन्होंने गलत पार्टी को वोट दिया।
इसलिए यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम देश के लिए एक विकल्प पेश करें। देश को बचाने के लिए सभी को एक साथ आना होगा, अपने अहंकार और मतभेदों को दूर रखना होगा। यदि आप क्षेत्रीय दलों को हटा दें, तो कम से कम 200 सीटें ऐसी हैं जहां कांग्रेस और भाजपा का सीधा मुकाबला है, लेकिन जिन क्षेत्रों में क्षेत्रीय दल मजबूत हैं, उन्हें ड्राइविंग सीट पर बैठाया जाना चाहिए।
इसके लिए समय आ गया है। अब क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखा जाना बाकी है।” वहीं पिछले बिहार विधानसभा चुनाव पर बात करते हुए उन्होंने इसे पहला चुनाव बताया जब उनके पिता लालू प्रसाद यादव शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं थे। उन्होंने पार्टी को दुनिया के सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के सामने चुनाव लड़ने और जिसके पास केंद्रीय मंत्रियों का लंबी फौज होने की बात कही।
तेजस्वी ने आरोप लगाते हुए कहा कि जनता ने महागठबंधन को चुना था लेकिन चुनाव आयोग के एनडीए के पक्ष में होने की बात कही।
कांग्रेस को इस चुनाव में 70 सीटें देने के सवाल पर तेजस्वी ने कहा कि “हम जब गठबंधन बनाते हैं तो कोई एक पार्टी के रूप में नहीं लड़ते। हर पार्टी चाहती है कि वो ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़े। आपको कुछ छोटे त्याग करने होते हैं, और बिहार में सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते, हमने वह किया और सभी को एक साथ लाया।”
चिराग पासवान के मुद्दे पर भी अपनी बात रखते हुए तेजस्वी ने कहा “चिराग पासवान के साथ हमारे हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं और मेरे पिता के भी दिवंगत रामविलास पासवान के साथ अच्छे संबंध थे। उन्होंने यूपीए-1 में साथ काम किया। मीडिया के माध्यम से भी हमने हमेशा कहा है कि चिराग पासवान को अपनी विचारधारा में और अधिक स्पष्ट होने की जरूरत है।”
तो वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ जाने के सवाल पर तेजस्वी ने तंज कसा कि “आप उन पर भरोसा नहीं कर सकते। हमने उन्हें एक मौका दिया और उन्होंने वही किया जिसके लिए वह जाने जाते हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान उन्होंने फिर यू-टर्न लिया।
उनकी बातों का कोई मूल्य नहीं है। हमारे पास कोई मशीन नहीं है, जिसके जरिए यह पता किया जा सके कि नीतीश कुमार हमारे साथ आएंगे और फिर पलटी नहीं मारेंगे।” आगे की रणनीति और बंगाल चुनाव को उन्होंने बंगाल की जनता द्वारा देश को एक अच्छा संदेश बताया। तेजस्वी के अनुसार बंगाल चुनाव “यह दर्शाता है कि लोग धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करते हैं।
उन्होंने इसके लिए वोट किया और ममता बनर्जी के काम के लिए। वहां भाजपा के प्रयास विफल रहे। ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, शरद पवार जैसे क्षेत्रीय पार्टी के नेताओं से हम समय-समय पर मिलते रहते हैं। सभी को देश की चिंता है। जल्द ही रणनीति बनाई जाएगी।
हमें अपने अहंकार और मतभेदों को दूर करने की जरूरत है, कौन क्या पद प्राप्त करता है, हमें इसे भूल जाना चाहिए। देश बचेगा तो हमें पद मिलेंगे। अगर भाजपा कुछ और समय तक रहे, तो कोई देश नहीं होगा।”
अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए तेजस्वी ने विपक्ष को सलाह भी देने के बारे में कहा, “मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि क्या होना चाहिए। बाकी क्षेत्रीय पार्टियों के नेताओं पर निर्भर है। मैं किसी पर भी दबाव नहीं दे सकता। मैं किसी का गठबंधन नहीं करा सकता।
कौन सहमत है,किसको साथ आना चाहिए, किसको नहीं, ये उनका फैसला है। लेकिन, एक चीज है, भविष्य में जब भी इतिहास पढ़ा जाएगा, लोग हमें माफ नहीं करेंगे।”
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